प्रदीप सावंत
अकेला
यह बात सबको मालूम है कि मुंबई पुलिस और अंडरवर्ल्ड का भाई-भाई, फिफ्टी-फिफ्टी का रिश्ता है। असल में अंडरवर्ल्ड ज़िंदा ही था मुंबई पुलिस की बदौलत। सबूत भी है। सैकड़ों उदाहरण भी हैं। एक ताजातरीन उदाहरण लीजिये। मुंबई पुलिस के रिटायर्ड उपायुक्त [डीसीपी] प्रदीप सावंत ने अपनी प्रॉपर्टी की डिस्प्यूट सेटल करने के लिए अपने पार्टनर को गैंगस्टर सुभाष सिंह ठाकुर के पास भेज दिया। और प्रदीप सावंत के भाई दिलीप सावंत ने उसी पार्टनर को दूसरे गैंगस्टर बबलू श्रीवास्तव से बात करवाई। धमकी दिलवाई।
प्रदीप सावंत और दिलीप सावंत ठाणे जिले के मीरा रोड में अविघ्न फेज़-2 नाम से 14,380 वर्ग मीटर का एक प्लॉट डेवलप कर रहे हैं। यह प्लॉट मीरा-भायंदर-वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय से सटकर है। प्रोजेक्ट में कुल इन्वेस्टमेंट 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा का है लेकिन रेरा को 265 करोड़ रुपये ही बताया है। कमाई की उम्मीद 900 से 1000 करोड़ रुपये है। इस प्रोजेक्ट में प्रदीप सावंत और दिलीप सावंत ने फ्रंटमैन [ऑन पेपर] प्रशांत वघासिया और विनोद वघासिया को रखा हुआ है। दूसरे पार्टनर विवेकानंद झा हैं। विवेकानंद झा मूलतः सूरत के रहनेवाले हैं और बड़े व्यवसायी हैं। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। प्रोजेक्ट के बगल से एक रास्ता निकल गया और एफएसआई भी दोगुनी [दो से चार] हो गई। प्रोजेक्ट की वैल्यू काफी बढ़ गई। इससे प्रदीप सावंत और दिलीप सावंत के मन में लालच आ गई। पूरी मलाई खाने के मकसद से उन्होंने विवेकानंद झा पर दबाव डाला कि प्रोजेक्ट छोड़ दो। विवेकानंद झा ने प्रोजेक्ट छोड़ने से मना कर दिया।
प्रदीप सावंत और दिलीप सावंत ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाए। अमूमन महाराष्ट्र [मुंबई] पुलिस जो अपनाती है। परन्तु विवेकानंद झा टस से मस नहीं हुए। फिर प्रदीप सावंत अपनी औकात पर आ गए। उन्होंने विवेकानंद झा को बताया कि इस प्रोजेक्ट के मालिक अथवा फाइनेंसर गैंगस्टर सुभाष सिंह ठाकुर हैं। सुभाष सिंह ठाकुर जो फैसला करेंगे वो तुम्हें मानना पड़ेगा। सुभाष सिंह ठाकुर इस वक़्त उत्तर प्रदेश की वाराणसी जेल में हैं लेकिन बीमारी का बहाना बनाकर बीएचयू अस्पताल में आराम फरमा रहे हैं। प्रदीप सावंत ने विवेकानंद झा को सुभाष सिंह ठाकुर की अप्वाइंटमेन्ट दिलवा दी। 18 सितम्बर 2021 को विवेकानंद झा बीएचयू में सुभाष सिंह ठाकुर से मिले। सुभाष सिंह ठाकुर है तो गैंगस्टर। वो सत्यनारायण भगवान की कथा तो सुनाएगा नहीं। उसने विवेकानंद झा को धमकी दे दी। सुभाष सिंह ठाकुर ने बताया कि वह प्रोजेक्ट उसका ही है। प्रदीप सावंत उसका ही बच्चा है। उसके लिए ही काम करता है। तुम प्रोजेक्ट से हट जाओ। नहीं तो प्रदीप सावंत तुम्हारा वही हाल करेगा जो प्रदीप शर्मा ने मनसुख हिरण का किया था।
बड़े मियाँ तो बड़े मियाँ, छोटे मियाँ सुबहानल्लाह !

ऊपर की पटकथा आपने बड़े मियाँ यानी प्रदीप सावंत की पढ़ी। अब छोटे मियाँ यानी दिलीप सावंत की पढ़िए। जब सुभाष सिंह ठाकुर से मीटिंग और धमकी से विवेकानंद झा ने प्रोजेक्ट नहीं छोड़ा तो छोटे मियाँ दिलीप सावंत ने अपना हथकंडा अपनाया। दिलीप सावंत ने अप्रैल 2024 में विवेकानंद झा की गैंगस्टर बबलू श्रीवास्तव से फोन पर बात कराई। बबलू श्रीवास्तव ने विवेकानंद झा को अपनी स्टाइल में धमकाकर प्रोजेक्ट से अलग होने को कहा। बबलू श्रीवास्तव ने विवेकानंद झा को यह भी बताया कि तुम्हारे प्रोजेक्ट से हटने के बाद रॉ ऑफिसर हिमांशु शुक्ला उसमें 100 करोड़ रुपये इन्वेस्टमेंट करेंगे। ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ़ बबलू श्रीवास्तव इस वक्त उत्तर प्रदेश की बरेली जेल में बंद है। विवेकानंद झा को डराने के लिए दिलीप सावंत अक्सर बबलू श्रीवास्तव से फोन पर बात करते रहते हैं। बावजूद इन सबके विवेकानंद झा ने प्रोजेक्ट नहीं छोड़ा है।
प्रदीप सावंत का नाम लेते ही लोग तपाक से कह देते हैं वो तेलगीकाण्ड वाला न। प्रदीप सावंत स्टैम्प पेपर घोटाले के मास्टरमाइंड अब्दुल करीम तेलगी के साथ गिरफ्तार हुए थे। इन पर मकोका लगा था। जब वे मुंबई पुलिस की क्राइम ब्राँच के डीसीपी थे तो इन्होंने पूरी मुंबई पुलिस को हाईजैक कर लिया था। इनके आगे तब के पुलिस कमिश्नर और गृहमंत्री की भी नहीं चलती थी। प्रदीप सावंत ऐसे ऑफिसर थे जिन्होंने पुलिस मुख्यालय में अपनी केबिन की लॉबी में सीसीटीवी लगवा लिया था। उन्हें डर था कि एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारी उन पर कभी भी ट्रैप लगा सकते हैं। इनके भाई दिलीप सावंत तब पीएसआई थे। किसी को-मतलब पुलिस और क्राइम रिपोर्टर को-भी मालूम नहीं था कि दिलीप सावंत कौन से डिपार्टमेंट में पोस्टेड हैं। सिर्फ इतना मालूम था कि वे रात को किसी न किसी डांस बार में डांस और ड्रिंक करते पाए जाते थे। वहां से कलेक्शन करके बड़े मियाँ यानी प्रदीप सावंत को लाकर देते थे। दिलीप सावंत बाद में ठाणे जिले के शाहपुर विभाग के डीवायएसपी बने। यहां मई 2020 में 50 लाख रुपये की रिश्वत मांगने की इनके खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई थी। जून 2011 में दिलीप सावंत चेम्बूर [तिलक नगर] के नटराज बार में चीटिंग के आरोपी किशोर करंजिया साथ शराब पी रहे थे। किसी बात पर बिजनेसमैन मोनी सिंह से मारपीट कर बैठे। मोनी सिंह ने दिलीप सावंत की जमकर धुलाई कर दी। दिलीप सावंत के सर पर बीयर की बोतल फोड़ दी। सर में 32 टाँके लगे थे। घाटकोपर के सत्यम हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा था। इस घटना के बाद तब के पुलिस आयुक्त अरुप पटनायक ने दिलीप सावंत को डिमोट कर दिया था। इंस्पेक्टर (पीआई) से असिस्टेंट इंस्पेक्टर [एपीआई] बना दिया था।
विवेकानंद झा प्रदीप सावंत और दिलीप सावंत के सुभाष सिंह ठाकुर और बबलू श्रीवास्तव के संबंधों से डरे हुए हैं। उन्होंने एबीआई से बात करने से इंकार कर दिया। विवेकानंद झा की वकील शैला पांडेय ने एबीआई को बताया कि पूरा मामला मीरा-भायंदर-वसई-विरार पुलिस को मालूम है। अब वे अगले माह बॉम्बे हाईकोर्ट में पिटीशन करेंगी। प्रदीप सावंत और दिलीप सावंत पर मकोका के तहत कार्रवाई करवाएंगी।
इस प्रकरण में एक और कैरेक्टर है अख्तर खान। अख्तर खान प्रदीप सावंत और दिलीप सावंत का पंटर है। अख्तर खान के बारे में अगले अंक में विस्तार से।
