दाऊद इब्राहिम
अकेला
अकेला ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (एबीआई/abinewz.com) के पास इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि हिन्दुस्तान का दुश्मन नंबर-1 दाऊद इब्राहिम वर्ष 2005 में मालेगाँव आया था. मालेगाँव में उसने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेता मुपल्ला लक्ष्मणा राव उर्फ डॉ. गणपति और अपनी बहन हसीना पारकर के साथ मालेगाँव में बम ब्लास्ट करने, भगवा आतंकवाद का नामकरण करने और पाकिस्तान से भारत के माओवादियों को हथियार सप्लाई करने की योजना को अंतिम रूप दिया था.
पहला : पिछले कुछ सालों से विश्व के कई देशों में इस्लाम के खिलाफ आंदोलन चल रहा है. भारत में किसी भी आतंकवादी हमले अथवा बम ब्लास्ट के बाद तथाकथित बुद्धिजीवी तथा सेक्युलरिज्म के ठेकेदार जोर-शोर से यह प्रसारित करने लगते थे कि आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता. लेकिन जब कोई एजूकेटेड हिन्दुस्तानी यह पूछ लेता कि सारे आतंकवादी मुसलमान ही क्यों होते हैं और वे पाकिस्तानी फैक्ट्री के प्रॉडक्ट ही क्यों निकलते हैं तो उनके पास इनका कोई माकूल जवाब नहीं होता. इससे इस्लाम, पाकिस्तान और मुसलमान विश्व पटल पर बेनकाब हो रहे थे. दूसरा: नेपाल में पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के प्रधानमंत्री बनने के बाद नेपाली माओवादियों ने भारत में माओवादियों को हथियारों की सप्लाई बंद कर दी. पाकिस्तान से सीधे भारतीय माओवादियों को हथियार की सप्लाई करने और मुसलमानों के बजाय हिन्दू, हिन्दुत्व, आरएसएस (RSS) और विश्व हिन्दू परिषद (VHP) को आतंकवादी संगठन घोषित करने की जिम्मेदारी पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने दाऊद इब्राहिम को दी.
एक समय दक्षिण मुंबई के डोंगरी की मस्जिदों के सामने से नमाजियों के जूते-चप्पल चुराने वाले दाऊद इब्राहिम को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अलकायदा प्रतिबंध समिति ने वैश्विक आतंकवादी (global terrorist) घोषित किया हुआ है. एफबीआई और फोर्ब्स की सूची में यह मोस्ट वांटेड और भगोड़ा करके शामिल है.
दोनों कामों को अमली जामा पहनाने के लिए दाऊद इब्राहिम जून 2005 में भारत आया. वह सीधे मालेगाँव गया. उसके आने से पहले उसकी बहन लेडी डॉन हसीना पारकर ने जमीनी स्तर की तैयारी कर रखी थी. मालेगाँव में हसीना पारकर दाऊद के साथ थी. दूसरा व्यक्ति था खतरनाक माओवादी नेता मुपल्ला लक्ष्मणा राव उर्फ राधाकृष्ण उर्फ मलन्ना उर्फ डॉ. गणपति.
मूलतः तेलंगाना के करीमनगर जिले के बीरपुर गाँव का रहनेवाला मुपल्ला लक्ष्मणा राव उर्फ राधाकृष्ण उर्फ मलन्ना उर्फ डॉ. गणपति भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) का महासचिव था. इसके संगठन पर प्रतिबंध था और गणपति पर 2 करोड़ 67 लाख रुपये का इनाम था. देश विरोधी गतिविधियों में तो वह शामिल था ही नेपाल के माओवादी जो हथियार भारत के माओवादियों को भेजते थे गणपति उसे माओवादियों तक पहुंचाता था. गणपति छत्तीसगढ़ के बस्तर के अबूझमाड़ जंगल से अपनी गतिविधियां संचालित करता था.
इस मीटिंग में दाऊद ने पाकिस्तान से भारत माओवादियों को हथियार की सीधी सप्लाई कैसे करनी है पर योजना बनाई. दूसरे मालेगाँव में बम ब्लास्ट कर हिन्दू, हिन्दुत्व, आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देशद्रोही, मुसलमान विरोधी घोषित करने और RSS प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने की प्लानिंग की.
दाऊद इब्राहिम ने इसी मीटिंग में भगवा आतंकवाद शब्द ईजाद किया.
हसीना पारकर और डॉ. गणपति के अलावा उस मीटिंग में और कौन कौन था इसकी जानकारी ABI को नहीं मिल पाई. लेकिन लोगों को उनका काम बांट बांट कर दाऊद इब्राहिम उसी दिन मालेगाँव से पाकिस्तान के लिए रवाना हो गया.
संयोग देखिए कि मालेगाँव की दाऊद की इस मीटिंग के बाद अथवा मालेगाँव ब्लास्ट के पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार ने अगस्त 2008 में अलीबाग में राकांपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सबसे पहले ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द प्रयोग किया था. शरद पवार ने कहा था देश में सिर्फ इस्लामिक आतंकवाद ही नहीं है ‘हिन्दू आतंकवाद’ भी है.
मुम्बई से 200 किलोमीटर दूर नासिक जिले के उपनगर मालेगाँव में एक मस्जिद के पास 29 सितंबर 2008 को मोटरसाइकिल में ब्लास्ट हो गया था. इसमें 6 लोग मारे गए थे और 100 लोग घायल हो गए थे. क्रमशः…
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