संत निग्रहाचार्य
अकेला
मुंबई पुलिस की साइबर सेल हरिद्वार के संत गोवत्स ब्रह्मचारी गंगाधर खिलाफ यदि FIR दर्ज करने में विफल रहती है तो वकील घनश्याम उपाध्याय जल्द ही बॉम्बे हाईकोर्ट में रिट पिटीशन फाइल करेंगे। यह तय है। संत गंगाधर ने झारखंड के संत श्रीभागवतानन्द गुरु निग्रहाचार्य को मुस्लिम (सलीम खान) बताकर उनका सर कलम करने वाले को 11 लाख रुपये इनाम देने का फतवा जारी किया है।
श्रीमन्महामहिम विद्यामार्तण्ड निग्रहाचार्य श्रीभागवतानंद गुरु का जन्म 20 मार्च 1997 को झारखंड के बोकारो में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। निग्रहाचार्य ने मात्र सात साल की उम्र में विश्व पटल पर ख्याति अर्जित कर ली थी। उन्हें गीता कंठस्थ हो गयी थी। वे अपने धार्मिक उपदेशों, शोध लेखन, षड्यंत्र भेदक धारणाओं, लोकोपकारी गतिविधियों एवं व्याख्यानों के लिए प्रसिद्ध हैं। सनातन धर्म के ग्रंथों में उनकी विशेष दक्षता है। उन्होंने अनेकों विषयों पर संस्कृत, हिंदी एवं अंग्रेजी में कई पुस्तकें लिखी हैं, जिन्हें विश्व भर के कई विश्वविद्यालय एवं विद्वानों की सराहना प्राप्त हुई। वे विलुप्तप्राय निग्रह सम्प्रदाय के परमाचार्य हैं। उनकी इस उपलब्धि से लाखों भारतीय प्रभावित हैं तो लाखों दुश्मन भी हैं। उनसे जलन रखने वालों में ज़्यादातर तथाकथित संत और महात्मा ही हैं।
कुछ माह पूर्व निग्रहाचार्य राज दंतोपासना कर रहे थे। इस विशेष उपासना में 12 अग्निकुण्डों के मध्य खड़े होकर वे मंत्रोच्चार कर रहे थे। इसी उपासना का फोटो फेसबुक पर लोड कर हरिद्वार के संत गंगाधर ने उनके खिलाफ फतवा जारी कर दिया। गंगाधर ने उन्हें मुस्लिम (सलीम खान) करार दे दिया। साथ ही घोषणा की कि निग्रहाचार्य को एक चप्पल मारने वाले को 10 रुपये, 2 चप्पल मारने वाले को 500 रुपये, 3 चप्पल मारने वाले को 11,000 रुपये और मुंडी काटने वाले को 11,00,000 रुपये इनाम दिया जाएगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट (लॉ ज्यूरिस) के विख्यात वकील घनश्याम उपाध्याय खुद को निग्रहाचार्य का भक्त मानते हैं। गंगाधर की इस हरकत (फतवा) से निग्रहाचार्य के लाखों भक्तों के साथ-साथ घनश्याम उपाध्याय की भी भावना आहत हो गयी। वे सदमें में चले गए। घनश्याम उपाध्याय ने 25 दिसम्बर 2024 को मुंबई पुलिस की साइबर सेल को शिकायती पत्र लिखकर गंगाधर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 196(1)(a), 196(1)(b), 196(1)(c), 196(2), 299, 302, 351(2), 351(3), 351(4), 352, 353(1)(b), 353(1)(c), 353(2), 353(3), 356(2) आर/डब्ल्यू 61(2) और धारा आईटी एक्ट-2000 की धारा 66(सी), 66(डी) और 66एफ(1)(ii)(बी) और 66एफ(2) के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत पत्र की कॉपी ABI के पास है।
ABI से बातचीत में घनश्याम उपाध्याय ने कहा कि- यदि मुंबई पुलिस गंगाधर के खिलाफ FIR दर्ज करने में विफल रहती है तो वे बॉम्बे हाईकोर्ट में रिट पिटीशन फाइल कर FIR दर्ज करवाएंगे।

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