राजेंद्रसिंह भुल्लर “महाराज”
अकेला
अजीत भाटिया, मोहन ददलानी, इन्द्रलाल थारवानी और दीपक जगवानी सोनारा हॉल के पीछे, उल्हासनगर- 1 (यू-नंबर- 398, सीटीएस नंबर-6684, सीट नंबर-72) में 13 महले की एक बिल्डिंग बना रहे हैं। प्रथम यह कि इस प्लॉट पर बिल्डिंग का प्लान पास ही नहीं हो सकता। फिर उल्हासनगर महानगरपालिका ने अपनी स्पेशल योग्यता दिखाई और स्पेशल केस के तहत इसका प्लान पास कर दिया। स्पेशल केस के लिए स्पेशल डॉक्युमेंट्स की जरूरत थी तो स्पेशल चीटर अजीत भाटिया की सेवायें लीं । स्पेशल चीटर अजीत भाटिया ने सारे स्पेशल डॉक्युमेंट्स उपलब्ध करा दिए। इसीलिए तो ABI लिखता है-इट हैपेन्स ओनली इन उल्हासनगर !!
शिवसेना के वरिष्ठतम नगरसेवक और नेता राजेंद्रसिंह भुल्लर “महाराज” ने महापालिका में शिकायत कर अजीत भाटिया, मोहन ददलानी, इन्द्रलाल थारवानी, दीपक जगवानी और भूषण रूपाणी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। भूषण रूपाणी पेशे से आर्किटेक्ट है परन्तु अजीत भाटिया से कम स्पेशल चीटर नहीं है। प्रत्येक बड़े बिल्डिंग फ्रॉड मामले में भूषण रूपाणी का नाम रहता ही है। शिकायत की प्रति ABI के पास है।
शिकायत के अनुसार अजीत भाटिया, मोहन ददलानी, इन्द्रलाल थारवानी और दीपक जगवानी कोहिनूर बिल्डर्स एन्ड डेवलपर्स के नाम से 2351.1/9 चौरस यार्ड भूखंड पर बिल्डिंग का निर्माण कर रहे हैं। दस्तावेज (क्रमांक- 772/1/16/2001) बताते हैं कि 2351.1/9 चौरस यार्ड में से 560 चौरस यार्ड की मालकिन निर्मलादेवी बसंतराम श्रीरंगी थीं। निर्मलादेवी बसंतराम श्रीरंगी ने 12 अप्रैल 2001 को 560 चौरस यार्ड शंकर उत्तमचंद शर्मा को बेच दी थी। 23 दिसम्बर 2006 को शंकर उत्तमचंद शर्मा की मौत हो गई।
खेल शुरू होता है अब। शंकर उत्तमचंद शर्मा की 23 दिसम्बर 2006 को मौत हो गयी परन्तु शंकर उत्तमचंद शर्मा ने अपनी मौत से आठ महीने बाद खुद 21 अगस्त 2007 को चेंज ऑफ़ नेम के लिए आवेदन दे दिया। इससे अलग एक वकील ने टायटल क्लियरेशन के लिए 16 अगस्त 2021 को आवेदन दिया जिसे प्रशासन ने तुरंत मंजूर (क्रमांक- 2025/2017) भी कर लिया। परन्तु वकील ने इस आवेदन में शंकर उत्तमचंद शर्मा को असली मालिक बताया। वकील के अनुसार शंकर उत्तमचंद शर्मा 16 अगस्त 2021 को ज़िंदा थे।
अब एक और मजेदार घटना। शंकर उत्तमचंद शर्मा ने अपनी मौत के बाद उक्त भूखंड को 5,60,000 रुपये में मोहन ददलानी को बेच दी। मोहन ददलानी ने बैक डेटेड स्टैम्प पेपर हासिल किया। उस पर एग्रीमेंट ऑफ़ सेल बनाया और उसे मुंबई के किला कोर्ट में नोटरी करवा ली। सेल ऑफ़ एग्रीमेंट का पेपर देखकर कोई भी बता सकता है कि यह फर्जी है। हस्ताक्षर नकली हैं। इससे बड़ी बात। मोहन ददलानी ने उक्त नोटराइज़्ड-सेल ऑफ़ एग्रीमेंट-डॉक्युमेंट्स का मुद्रांक शुल्क अभय योजना के तहत वर्ष 2017 में भरा दिखाया है। परन्तु वर्ष 2017 में सरकार ने अभय योजना लागू ही नहीं की थी। वर्ष 1994-95 और 2023-24 में राज्य सरकार की अभय योजना लागू थी। अजीत भाटिया के चेले श्रीमान मोहन ददलानी जी ने एग्रीमेंट ऑफ़ सेल, किला कोर्ट की नोटरी और राज्य सरकार की अभय योजना की मुहर सब फर्जी बना लिए। फर्जी हस्ताक्षर कर लिए। कायदे से सभी दस्तावेज, कन्फर्मेशन दीड (सम्मति पत्र) दुय्यम निबंधक कार्यालय में रजिस्टर्ड कराना चाहिए था। परन्तु रजिस्टर्ड ही नहीं कराये।
उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के स्पेशल प्लान और स्पेशल आर्किटेक्ट भूषण रूपाणी की स्पेशल भूमिका के बारे में पढ़िए अगले अंक में …
