सुप्रीम कोर्ट के 33 न्यायाधीशों की संपत्ति का सारा ब्यौरा सार्वजनिक

 

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने न्यायाधीशों की संपत्ति और देनदारियों को सार्वजनिक कर दिया है। 33 न्यायाधीशों की संपत्ति का सारा ब्यौरा सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। यह इतिहास में पहली बार है कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति की घोषणा सार्वजनिक की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और 20 अन्य जजों की घोषणाएं अपलोड की गई हैं। ⁠इनमें वे तीन जज भी शामिल हैं जो निकट भविष्य में CJI बनने की कतार में हैं। ⁠

सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2025 को फैसला लिया था कि सभी जजों की संपत्ति का ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। संजीव खन्ना ने 11 नवंबर 2024 को भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। वे इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के जज और दिल्ली हाई कोर्ट के जज रह चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार CJI संजीव खन्ना की संपत्ति में उनकी बचत और निवेश का बड़ा हिस्सा शामिल है। उनकी 55 लाख रुपये की FD और 1 करोड़ रुपये का PPF उनके वित्तीय निवेश का मुख्य हिस्सा है। इसके अलावा उनके पास कुछ अन्य बचत और संपत्ति भी हैं, जिनमें अचल संपत्ति और अन्य निवेश शामिल हैं। उनके पास दिल्ली में दो फ्लैट हैं। एक चार बेड रूम का फ्लैट कॉमनवेल्थ विलेज में है जबकि दो बेडरूम का एक फ्लैट अन्य इलाके में है। इसके अलावा उन्होंने बेटी के साथ गुरुग्राम में भी एक फ्लैट खरीदा है। उनके पास उनके गृह जिले हिमाचल प्रदेश में कुछ पैतृक संपत्ति है।

14 मई से चीफ जस्टिस बनने जा रहे जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई के पास महाराष्ट्र के अमरावती में पैतृक मकान और कृषि भूमि है। साथ ही मुंबई के बांद्रा और दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी में उनके फ्लैट हैं। उनके पास नागपुर में भी कृषि भूमि है। जस्टिस गवई ने अपने बैंक खाते, आभूषण और पत्नी की संपत्ति की जानकारी भी साझा की है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि जजों की संपत्ति का ब्योरा स्वैच्छिक आधार पर वेबसाइट पर डाला जा रहा है. CJI संजीव खन्ना ने अपनी संपत्ति का ब्योरा साझा करके इस दिशा में एक मिसाल कायम की है। उनकी संपत्ति में FD और PPF के अलावा कुछ अन्य भी हो सकते हैं. जैसे म्यूचुअल फंड, शेयर या अन्य बचत योजनाएं, लेकिन अभी तक इनकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। आमतौर पर जजों की संपत्ति में उनकी सैलरी से होने वाली बचत, पारिवारिक संपत्ति और निवेश शामिल होते हैं. सुप्रीम कोर्ट के इस कदम की खूब सराहना हो रही है।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई को जनता की जानकारी और जागरूकता के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है। 9 नवंबर, 2022 से 5 मई, 2025 की अवधि के दौरान हाईकोर्ट के जजों के रूप में नियुक्तियों के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा अनुमोदित प्रस्ताव, जिनमें नाम, उच्च न्यायालय, स्रोत – सेवा या बार से, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा सिफारिश की तारीख, न्याय विभाग द्वारा अधिसूचना की तारीख, नियुक्ति की तारीख, विशेष श्रेणी (एससी/एसटी/ओबीसी/अल्पसंख्यक/महिला) और क्या उम्मीदवार किसी मौजूदा या सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय/सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से संबंधित है, को भी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।

इसके मुताबिक तत्कालीन CJI डीवीई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाले कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित कुल 17 नाम नियुक्ति के लिए सरकार के पास लंबित हैं। CJI खन्ना के नेतृत्व वाले कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित कुल 12 नाम सरकार के पास लंबित हैं। इस प्रकार 9 नवंबर, 2022 से न्यायाधीशों के रूप में पदोन्नति के लिए कुल 29 नाम सरकार के पास लंबित हैं।

दूसरी और उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय समिति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों पर सीजेआई संजीव खन्ना को रिपोर्ट सौंपी। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी एस संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति अनु शिवरामन वाली तीन सदस्यीय समिति ने तीन मई को अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया।

रिपोर्ट चार मई को सीजेआई को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपी गई। इसमें 14 मार्च को रात करीब 11.35 बजे न्यायमूर्ति वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में आग लगने के बाद कथित तौर पर नकदी मिलने के विवाद पर समिति के निष्कर्ष शामिल हैं।

उच्चतम न्यायालय ने एक बयान में कहा, ‘‘सेवारत न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने तीन मई की अपनी रिपोर्ट चार मई को प्रधान न्यायाधीश को सौंप दी है। ” शीर्ष अदालत ने 28 मार्च को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से कहा था कि वह न्यायमूर्ति वर्मा को फिलहाल कोई न्यायिक कार्य न सौंपें।

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