शशि थरूर
भारत की नरेंद्र मोदी सरकार अब ऑपरेशन सिंदूर का संदेश दुनिया तक पहुंचाना चाहती है। जिसके लिए सरकार विदेशों में विशेष दूत भेजेगी। इसके लिए सरकार ने कई विपक्षी सांसदों से संपर्क किया है और उन्हें विश्व की राजधानियों में भेजी जाने वाली टीमों का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कई विपक्षी सांसदों को फोन करके “राष्ट्रीय हित” में प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा (दूत) बनने के लिए आमंत्रित किया है। बताया जा रहा है कि सरकार जिन सांसदों के संपर्क में है, उनमें कांग्रेस के शशि थरूर और सलमान खुर्शीद, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले, टीएमसी के सुदीप बंद्योपाध्याय, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, डीएमके की कनिमोझी और बीजेपी के बीजे पांडा शामिल हैं। खुर्शीद पूर्व विदेश मंत्री हैं, जबकि थरूर विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं।
विचार यह है कि 5-6 प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों में भेजे जाएं, जो पाकिस्तान से उत्पन्न आतंकवाद पर नई दिल्ली की स्थिति को स्पष्ट करें, जिसमें पहलगाम आतंकवादी हमले और भारत के खिलाफ किए गए अन्य आतंकवादी कृत्यों, ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान के खिलाफ सरकार द्वारा की गई कूटनीतिक पहलों का विवरण दिया जाए।
यह कदम पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार के उस निर्णय की याद दिलाता है, जिसमें उसने तत्कालीन विपक्षी नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (यू.एन.एच.आर.सी.) के विशेष सत्र में भाग लेने के लिए भेजा था, जहां जम्मू -कश्मीर में मानवाधिकारों के मामले में भारत की निंदा करने के लिए पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित प्रस्ताव को सफलतापूर्वक विफल कर दिया गया था।
