नाम में क्या रखा है, कहने वाला शेक्सपियर आज ज़िंदा होता तो शर्म के मारे मर जाता। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान के उपनाम ‘पाक’ से हिन्दुस्तानी बेहद नफरत करने लगे हैं। हिंदुस्तानी उसका नाम तक लेना नहीं चाहते। राजस्थान के जयपुर के एक मिठाई विक्रेता ने दक्षिण भारत की मशहूर मिठाई ‘मैसूर पाक’ का नाम बदल कर ‘मैसूर श्री’ रख दिया है। ‘मोती पाक’ मिठाई ‘मोती श्री’ हो गयी है तो ‘केसर पाक’ ‘केसर श्री’ हो गयी है।
22 अप्रैल 2025 को भारत के अनन्तनाग ज़िले में पहलगाम के पास बैसरन घाटी पर पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26 भारतीय हिन्दुओं की गोली मारकर हत्या कर दी। आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा की एक शाखा प्रतिरोध मोर्चा (TRF) ने नरसंहार की ज़िम्मेदारी ली। इसके बाद से तो भारतीयों का खून उबाल मार रहा है। अलग लेवल की देशभक्ति जाग गयी है। पाकिस्तान को सब अपने-अपने तरीके से निपटा रहे हैं। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक, वाटर स्ट्राइक के बाद अब स्वीट स्ट्राइक की गयी। इसमें उन मिठाइयों के नाम बदल दिए गए जिसमें से ‘पाक’ शब्द की घिन आ रही थी।
इससे पहले साल 2020 में गलवान में चीन के सैनिकों के साथ भारतीय सैनिकों की झड़प की वजह से तनाव काफ़ी बढ़ गया था। इसका असर ये हुआ कि भारत में चीनी सामानों का ज़ोरदार विरोध हुआ और उसका बहिष्कार किया गया।
‘मैसूर पाक’ मिठाई के नाम से ही पता चलता है कि इसका इतिहास मैसूर से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1902 से 1940 के बीच मैसूर पर शासन करने वाले महाराजा नलवाड़ी कृष्णराज वोडेयार खाने के शौक़ीन थे। वो अक्सर अपने रसोइयों से तरह-तरह के व्यंजन बनाने के लिए अलग-अलग चीजों के साथ प्रयोग करने को कहते थे। एकदिन उनका रसोइया काकासुर मदप्पा मिठाई बनाना भूल गया। उसने जल्दबाजी में एक मिठाई बनाई और घबराहट में उसका नाम ‘मैसूर पाक’ रख दिया। कन्नड़ भाषा में बेसन के साथ चीनी की चाशनी मिले मिश्रण को ‘पाका’ कहते हैं। लेकिन जब इसे अंग्रेज़ी में बोला या लिखा जाता है तो पाका में ‘आ’ का उच्चारण नहीं किया जाता और ये केवल ‘पाक’ कहलाता है।
इतनी मशक्कत से बनी ‘पाक’ नाम वाली मिठाई के दिन अब पूरे हो गए। इसी तरह ‘चांदी भस्म पाक’ को ‘चांदी भस्म श्री’ और ‘स्वर्ण भस्म पाक’ को ‘स्वर्ण भस्म श्री’ कर दिया गया है। भारतीयों को इतने पर भी संतोष नहीं है। वे मांग कर रहे हैं कि ‘मैसूर पाक’ का नाम ‘मैसूर भारत’ कर दिया जाये।

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