भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने एक बड़ा दावा किया है। साल 1988 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए परमाणु समझौते को लेकर उन्होंने कहा कि यह अमेरिका के दबाव में हुआ था। तब राजीव गाँधी प्रधानमंत्री थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक गोपनीय पत्र साझा करते हुए निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच बातचीत का एजेंडा तय किया था।
अपने एक्स पोस्ट में पत्र की एक प्रति शेयर करते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि यह पत्र रीगन द्वारा राजीव गांधी को संबोधित किया गया था। दुबे ने कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार पर अपनी विदेश नीति के निर्णयों में अमेरिकी हितों के साथ तालमेल करने का भी आरोप लगाया।
बता दें, 1988 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते को आधिकारिक तौर पर परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं के खिलाफ हमले के निषेध पर समझौते के रूप में जाना जाता है, इसपर 31 दिसंबर 1988 को साइन किया गया था और 27 जनवरी 1991 से यह लागू हुआ था। इस समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान को परमाणु सुविधाओं की सूची सालाना साझा करने और एक-दूसरे के परमाणु बुनियादी ढांचे पर हमला करने से परहेज करने के लिए बाध्य करता है।
निशिकांत दुबे ने राजीव गांधी द्वारा रीगन को पाकिस्तान के साथ मध्यस्थता की मांग करते हुए कथित तौर पर लिखे गए एक पत्र का भी जिक्र किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह कदम 1972 के शिमला समझौते का उल्लंघन है, जिसमें तीसरे पक्ष की मध्यस्थता पर रोक है।

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