मुंबई में नौकरानी ने घर मालिक को वृद्धाश्रम में डाला, उसके पहले करोड़ों की संपत्ति में एक तिहाई की पार्टनर बन बैठी

 

मुंबई में एक नौकरानी ने 82 वर्षीय आईआईटी बॉम्बे के रिटायर्ड प्रोफेसर की नकदी, गहने और चार फ्लैट्स में से एक-तिहाई हिस्सेदारी हड़प ली और फिर उन्हें विक्रोली के वृद्धाश्रम में छोड़ आई। प्रोफेसर के बेटे की शिकायत पर पवई पुलिस ने निकिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316(4) और 318(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

आरोपी महिला का नाम निकिता विजय नाईक मालूम पड़ा। निकिता की करतूतों का पर्दाफाश तब हुआ जब पुणे में रहने वाले बुजुर्ग के बेटे को हाउसिंग सोसाइटी की ओर से फ्लैट के नाम ट्रांसफर को लेकर जानकारी दी गई। शक होने पर बेटे ने मुंबई आकर पिता की हालत देखी तो उसके होश उड़ गए, इसके बाद उसने पवई पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस के अनुसार, रिटायर्ड प्रोफेसर मनमोहन साल 2009 से मुंबई के पवई हीरानंदानी गार्डन में अकेले रह रहे थे, जबकि उनकी पत्नी और डॉक्टर बेटा पुणे के पिंपरी-चिंचवड में शिफ्ट हो चुके थे। मनमोहन के पास चार फ्लैट्स से किराए की आय होती थी, जिससे वे अपना गुजारा करते थे।

साल 2017 में निकिता नाईक की मनमोहन से मुलाकात पवई के गार्डन में हुई, जहां वह टहलने जाते थे। धीरे-धीरे निकिता ने उनका विश्वास जीत लिया और उनके घर में काम करने लगी। समय के साथ वह उनकी देखभाल करने वाली बन गई और घर, संपत्ति, बैंक डिटेल्स, पासवर्ड जैसी सभी संवेदनशील जानकारियां हासिल कर लीं। FIR के अनुसार जैसे-जैसे प्रोफ़ेसर की नजर कमजोर होती गई, निकिता ने उनका फायदा उठाना शुरू किया। परिवार और रिश्तेदार होने के बावजूद निकिता ने उन्हें इसी साल फरवरी में विक्रोली के एक वृद्धाश्रम में भेज दिया।

पुलिस का कहना है कि अप्रैल में निकिता ने बुजुर्ग को मेडिकल चेकअप और लीगल फॉर्मेलिटी का बहाना देकर रजिस्ट्रेशन ऑफिस ले जाकर फ्लैट्स के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिए। आरोप है कि उसने चार फ्लैट्स में से एक-तिहाई हिस्सेदारी लगभग 6 करोड़ की संपत्ति अपने नाम करवा ली। प्रोफेसर के बैंक डिटेल्स और एटीएम पिन का इस्तेमाल कर 1.12 करोड़ रुपये के गहने और नकदी भी अपने नाम कर ली।

जब निकिता ने प्रोफेसर के फ्लैट के शेयर सर्टिफिकेट को अपने नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू की, तब सोसायटी कमेटी को शक हुआ। उन्होंने बेटे को सूचना दी, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। जब बेटा पुणे से पवई पिता के घर आया तो सारा सच सामने आ गया।

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