‘महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शाम 6 बजे तक होती रही वोटिंग’ पर याचिकाकर्ता को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जबरदस्त फटकारा, बोला शुक्र मनाइये कि….

 

चेतन अहिरे नामक एक व्यक्ति ने बॉम्बे हाइकोर्ट में याचिका डाली थी कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में शाम 6 बजे के बाद भी 74 लाख वोटिंग की गई थी। इसलिए चुनाव को रद्द कर दिया जाये। इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज याचिकाकर्ता चेतन अहिरे को कड़ी फटकार लगाते हुए पिटिशन रिजेक्ट कर दिया। कोर्ट ने चेतन अहिरे को फटकार लगाते हुए कहा कि इस तरह की याचिका से कोर्ट का पूरा दिन बर्बाद हो जाता है। हम ऐसे मामलों की लिस्टिंग तो करते भी नहीं हैं। शुक्र मनाइये कि कोर्ट आपके ऊपर कोई फाइन नहीं लगा रहा।

20 नवंबर 2024 को विधानसभा चुनाव के दौरान वोटिंग में गड़बड़ियों पर चेतन अहिरे नाम के शक्स ने बॉम्बे हाइकोर्ट में याचिका डाली थी। चेतन अहिरे का आरोप था महाराष्ट्र विधान सभा चुनावों में शाम 6 बजे के बाद भी 74 लाख से ज्यादा वोटिंग हुई थी। चेतन अहिरे की तरफ से सीनियर वकील और वंचित बहुजन आघाड़ी पार्टी प्रमुख प्रकाश आंबेडकर कोर्ट में केस लड़ रहे थे। प्रकाश आंबेडकर ने कोर्ट में दलील दी कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और जिससे जनता का विश्वास डगमगाया है। चुनाव आयोग ने उन वोटों का ब्योरा देने से इनकार कर दिया। जिससे चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठे। प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि ‘चुनाव में धोखाधड़ी हुई। या तो अधिकारियों ने या चुनाव आयोग ने गड़बड़ी की। इससे संविधान और जनता के विश्वास को ठेस पहुंची है।

चुनाव आयोग की ओर से वकील आशुतोष कुम्भकोणी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को पूरे राज्य के 288 विधानसभा क्षेत्रों के नतीजों को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि याचिका में किसी भी विजयी उम्मीदवार को पक्षकार नहीं बनाया गया, इसलिए इसे खारिज किया जाना चाहिए। भारत सरकार के वकील उदय वारुंजकर ने कहा कि याचिकाकर्ता को जनहित याचिका दायर करनी चाहिए थी, क्योंकि वे अपने लिए नहीं बल्कि आम जनता के लिए जानकारी मांग कर रहे थे।

जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस आरिफ डॉक्टर की बेंच ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से सवाल किया कि अगर शाम 6 बजे के बाद मतदान की प्रथा पहले से चली आ रही है, तो लोकसभा चुनाव में इस पर सवाल क्यों नहीं उठाया गया? कोर्ट ने कहा कि यह एक बेवजह की बात है कि 6 बजे के बाद डाले गए वोटों ने नतीजों को प्रभावित किया। कोई नहीं जानता कि उन वोटों से किसे फायदा हुआ। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए प्रकाश आंबेडकर से कहा कि शुक्र मनाइये कि आपके याचिकाकर्ता पर फाइन नहीं लगा रहे हैं।

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