सुधाकर चतुर्वेदी
अकेला
मालेगाँव ब्लास्ट- भगवा आतंकवाद के भाग-6 में आपने पढ़ा कि आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) के मुखिया हेमंत करकरे लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित का खंडाला में इन्कॉउंटर करनेवाले थे। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित के इन्कॉउंटर के बाद हेमंत करकरे सुधाकर ओंकारनाथ चतुर्वेदी उर्फ़ चाणक्य का भी इन्कॉउंटर कर देते। ABI (abinewz.com) के इन्वेस्टीगेशन में आया कि सुधाकर चतुर्वेदी को पकड़ा था नासिक में लेकिन चार दिन बाद उनकी गिरफ़्तारी मुंबई के दादर रेलवे स्टेशन से दिखाई। और बहुत कुछ… मजेदार… और भयानक तथ्य आगे पढ़िए सुधाकर चतुर्वेदी की गिरफ़्तारी में।
बता दें कि सुधाकर चतुर्वेदी अभिनव भारत संस्था के राष्ट्रीय महासचिव थे। साथ ही वे मिलिट्री इंटेलीजेंस (MI) के इन्फॉर्मर थे। वे MI के पे रोल पर थे। उनको MI ने आइडेंटिटी कार्ड दिया हुआ था। यहां तक कि उनके देवलाली के घर का किराया MI देती थी। मालेगाँव ब्लास्ट-भगवा आतंकवाद के भाग-6 में आपने पढ़ा कि सुधाकर चतुर्वेदी के इसी बंद घर में ATS के PSI शेखर बागड़े ने 3 अक्टूबर 2008 को RDX प्लांट किया था। कर्नल प्रवीण माधव ख़ानज़ोड़े और सूबेदार केशव कारभारी पवार उर्फ़ केके पवार ने शेखर बागड़े को RDX प्लांट करते रंगेहाथ पकड़ा था। इसी तारीख को हेमंत करकरे खंडाला में प्रसाद पुरोहित का इन्कॉउंटर करने वाले थे। इसके बाद सुधाकर चतुर्वेदी को भी इन्कॉउंटर में मार देते।
उल्लेखनीय है कि शेखर बागड़े और लीलाधर कानडे ने केशव पवार के मार्फ़त सुधाकर चतुर्वेदी को 24 अक्टूबर 2008 को नासिक के देवलाली में एक पेट्रोल पम्प पर मिलने के लिए बुलाया। सुधाकर चतुर्वेदी अपनी कार ठीक से पेट्रोल पम्प पर पार्क भी नहीं कर पाए थे कि शेखर बागड़े और लीलाधर कानडे ने उन्हें ‘उठा’ लिया। नासिक और मुंबई की ATS ऑफिस में चार दिन तक अवैध तरीके से रखने के बाद 4 नवम्बर 2008 को उन्हें मुंबई के दादर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार दिखा दिया।
गिरफ़्तारी की कहानी मज़ेदार है
ATS ने बताया कि सुधाकर चतुर्वेदी 4 नवम्बर 2008 को दादर रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध अवस्था में घूम रहे थे। उन्हें मुंबई शहर के माटुंगा पुलिस स्टेशन लाकर उनकी तलाशी ली गयी तो उनके पास से एक रिवॉल्वर, 3 कारतूस और मिलिट्री का एक ‘फर्जी’ आइडेंटिटी कार्ड मिला। ध्यान दीजिये कि उस वक्त उनके पास से कोई मोबाइल फ़ोन का मिलना नहीं दिखाया। चूँकि मिलिट्री का आइडेंटिटी कार्ड फर्जी था इसलिए ATS ने FIR में IPC की धारा 420 भी जोड़ दिया।
ध्यातव्य है कि आइडेंटिटी कार्ड लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने जारी किया था। आइडेंटिटी कार्ड पर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित की सिग्नेचर थी। परन्तु ATS अथवा माटुंगा पुलिस ने सिग्नेचर वेरीफिकेशन नहीं करवाया। अथवा मिलिट्री प्रशासन से कांटेक्ट नहीं किया या इन्फॉर्म नहीं किया कि सुधाकर चतुर्वेदी के पास से मिलिट्री का आइडेंटिटी कार्ड मिला है। सबसे महत्वपूर्ण बात, उस दिन पंचनामा अथवा तलाशी में सुधाकर चतुर्वेदी के पास से ATS ने मोबाइल फोन बरामद नहीं दिखाया। सुधाकर चतुर्वेदी को 20 नवम्बर 2008 को ठाणे सेन्ट्रल जेल से ATS अपनी हिरासत में ले कालाचौकी यूनिट लायी। यहां उनकी पहचान ACP मोहन कुलकर्णी से करायी। उनका नार्को टेस्ट कराया। नार्को टेस्ट अथवा अन्य पूछताछ में उनसे सवाल मालेगाँव ब्लास्ट के बारे में पूछे। जबकि उनके पास से अवैध हथियार बरामद हुए थे। आइडेंटिटी कार्ड फर्जी था। उसके बारे में कोई पूछताछ नहीं की।
ATS ने बताया कि सुधाकर चतुर्वेदी को मालेगाँव ब्लास्ट केस में 20 नवम्बर 2008 को गिरफ्तार किया गया। पुलिस निरीक्षक राजन घुले ने 25 नवम्बर 2008 को सुधाकर चतुर्वेदी के बंद घर का ताला तोड़कर तलाशी ली। पंचनामा किया। तलाशी के दौरान 5 सेंटीमीटर लंबा एक इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 170 सेंटीमीटर लम्बे सफ़ेद रंग के दो वायर, 3 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, पेन ड्राइव, रेलवे टिकट, आर्मी का एक और आइडेंटिटी कार्ड, अभिनव भारत की रसीद बुक, किताबें, घर गृहस्थी का कुछ सामान और बहुत कुछ बरामद किया। ध्यान देने वाली बात है कि सुधाकर चतुर्वेदी का उक्त घर 17 सितम्बर 2008 से बंद था। वे जबलपुर गए थे और हमेशा की तरह घर की चाभी सूबेदार केके पवार के पास जमा करके गए थे। 4 नवम्बर 2008 से ATS ने सुधाकर चतुर्वेदी को अपनी कस्टडी में ले लिया था। फिर 25 नवम्बर 2008 को उनके घर से जो 3 मोबाइल फोन बरामद किया, उसे 28 नवम्बर 2008 को डायरेक्ट्रेट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस लेबोट्रीज़ (FSL) जांच के लिए भेजा। FSL अधिकारी किरण देवकाते ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा कि उन तीन मोबाइल फोन में से एक फोन (Make-ZTC, Model-ZT555 और IMEI-358555010005990) ऑन मोड पर था। यानी फोन चालू था। सवाल है कि 25 नवम्बर से 28 नवम्बर तक अर्थात 3 दिन तक मोबाइल में कौन सी ऐसी बैटरी लगी थी कि वह चालू था। ऑन था।
एक और शॉकिंग घटना। ATS सुधाकर चतुर्वेदी को 24 नवम्बर 2008 को हेलीकॉप्टर से मुंबई से भोपाल ले गयी। भोपाल में मोबाइल फोन से उनकी बात समीर कुलकर्णी से करवायी। फिर उसी दिन उन्हें वापस मुंबई ले आयी। आश्चर्य है कि वह हेलीकॉप्टर इंडिया बुल्स कंपनी का था।
नोट: मुंबई से 200 किलोमीटर दूर नासिक जिले के उपनगर मुस्लिम बहुल इलाके मालेगाँव में 29 सितम्बर 2008 को एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में बम ब्लास्ट हो गया था। इस ब्लास्ट में 6 लोग मारे गए थे और लगभग 100 लोग घायल हो गए थे। क्रमशः …
