पहली बार लाल किला से RSS का नाम, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की RSS की सराहना !

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 79वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की जमकर सराहना की। उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन (NGO) करार देते हुए कहा कि संघ ने 100 वर्षों तक राष्ट्र की सेवा गौरवपूर्ण तरीके से की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 100 मिनट से भी ज्यादा के भाषण में RSS की 100 वर्ष से भी लंबी देश सेवा की यात्रा को लेकर इसे दुनिया के सबसे बड़े NGO की तरह बताते हुए जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “आज मैं बहुत ही गर्व के साथ एक बात का जिक्र करना चाहता हूं। आज से 100 साल पहले एक संगठन का जन्म हुआ- राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ। 100 साल की राष्ट्र की सेवा एक बहुत ही गौरवपूर्ण स्वर्णिम पृष्ठ है। व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर के 100 साल तक मां भारती के कल्याण का लक्ष्य लेकर के लक्षावधी स्वयं सेवकों ने मां भारती के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।”

संभवत: यह पहली बार था जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में RSS का इस तरह विस्तृत उल्लेख किया। नरेंद्र मोदी ने कहा, “संघ के कुछ स्वयंसेवकों से तैयार सेवा भारती संगठन झुग्गियों में बिना किसी सरकारी सहायता के काम करता है। ये लोग 1,25,000 सेवा प्रकल्प चलाते हैं। इसमें वे बच्चों को पढ़ाने और दूसरे काम करते हैं।”

बता दें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आएसएस) की स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के दिन नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। 20वीं सदी में भारत में एक अनूठे संगठन के रूप में उभरे RSS का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण और हिंदू समाज को संगठित करना रहा है। डॉ. हेडगेवार ने स्वतंत्रता से पहले के कठिन समय में जब विदेशी शासन ने भारत की सांस्कृतिक और मानसिक एकता को कमजोर किया था, समाज को एकजुट करने और राष्ट्रीय गौरव को पुनर्जनन देने का बीड़ा उठाया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य तिलक और महात्मा गांधी जैसे महान नेताओं के विचारों से प्रेरणा ली और एक ऐसे संगठन की नींव रखी जो समाज के हर क्षेत्र में राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करे।

पिछले 100 वर्षों में आरएसएस ने सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, श्रम, विकास और राजनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसकी शाखाएं देश भर में 57 हजार से अधिक स्थानों पर चल रही हैं, जो इसकी व्यापक पहुंच को दर्शाती हैं। संघ ने सामाजिक सुधार, अखंडता और राष्ट्रीय एकता के लिए कई आंदोलनों को प्रेरित किया है, जैसे कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और विद्या भारती। इन संगठनों ने शिक्षा, श्रम, और सामाजिक समरसता जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं।

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