ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. एस. सीतालक्ष्मी
इन्कम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) जयपुर में फैले भ्रष्टाचार के जाल को सीबीआई ने एक फ़िल्मी अंदाज़ में चलाए गए ऑपरेशन के जरिए बेनकाब किया है। कई दिनों तक चले इस सीक्रेट ऑपरेशन में सीबीआई ने न सिर्फ ट्रिब्यूनल की ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. एस. सीतालक्ष्मी को रंगेहाथ पकड़ा, बल्कि उनके साथ जुड़े एडवोकेट, पक्षकार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार और अकाउंटेंट मेंबर तक को गिरफ्तार कर लिया। कुल मिलाकर अब तक पांच गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और 1 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद की जा चुकी है।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन की शुरुआत तब हुई जब एजेंसी को सूचना मिली कि ITAT जयपुर में फैसलों में पक्षकारों से मोटी रकम लेकर मनचाहे आदेश दिलाए जा रहे हैं। सीबीआई ने कई दिनों तक एडवोकेट राजेंद्र सिसोदिया और ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. एस. सीतालक्ष्मी की गतिविधियों की निगरानी की। मंगलवार को जाल बिछाते हुए सीबीआई ने वकील सिसोदिया को 5.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। खास बात यह कि यह पूरी रकम हवाला चैनल के जरिए पहुंचाई गई थी। इसी दिन सीबीआई ने सिसोदिया, असिस्टेंट रजिस्ट्रार और ज्यूडिशियल मेंबर के खिलाफ मामला दर्ज कर ऑपरेशन को अगले चरण में बढ़ाया।
अगले ही दिन यानी बुधवार सुबह सीबीआई की टीम ITAT पहुंची और ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. एस. सीतालक्ष्मी को हिरासत में ले लिया। उनकी आधिकारिक कार की तलाशी में 30 लाख रुपये बरामद हुए। उसी दिन मुजम्मिल नाम के पक्षकार को भी गिरफ्तार किया गया, जिसने यह रकम कथित तौर पर फैसले प्रभावित कराने के लिए दी थी। सीबीआई को जांच में पता चला कि लंबे समय से यह सिंडिकेट अपीलों के निस्तारण में पैसों के बदले मनचाहे आदेश दिला रहा था।
मामले ने बड़ा मोड़ तब लिया जब ट्रिब्यूनल के अकाउंटेंट मेंबर कमलेश जयंतभाई राठौड़ को भी सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। उन्हें शुक्रवार को सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 1 दिसंबर तक रिमांड पर भेज दिया गया है। राठौड़ का कार्यकाल अगले महीने खत्म होने वाला था, ठीक उसी तरह जैसे ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. सीतालक्ष्मी का कार्यकाल भी दिसंबर में समाप्त होना था।
सीबीआई ने जयपुर, कोटा, जोधपुर सहित कई शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस दौरान 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश, हवाला ट्रांजैक्शन से जुड़े दस्तावेज, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और ऐसे कागजात मिले जिन्होंने इस नेटवर्क को एक संगठित गिरोह की तरह साबित कर दिया। सीबीआई अब ज्यूडिशियल मेंबर के पुराने फैसलों की भी जांच कर रही है और कई अधिकृत आदेशों पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
