मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले स्थित वीआईटी कॉलेज के कैंपस में तोड़फोड़ और आगज़नी की घटना सामने आई है। आगज़नी करने वाले कोई और नहीं बल्कि कॉलेज के ही स्टूडेंट्स थे। ये स्टूडेंट्स बीते कई दिनों से कैंपस में ख़राब पानी और खाने की गुणवत्ता को लेकर परेशान थे।
इलाक़े के सब-डिविज़नल ऑफ़िसर आकाश अमलकर का कहना है कि छात्र पानी की समस्या से परेशान थे और लगातार बीमार पड़ रहे थे। मंगलवार रात वीआईटी के छात्रों ने पानी और खाने की गुणवत्ता को लेकर मैनेजमेंट से चर्चा की लेकिन कोई समाधान न मिलने पर कॉलेज परिसर में तोड़फोड़ और आगज़नी की।
जब छात्रों ने यूनिवर्सिटी की अव्यवस्थाओं को लेकर विरोध किया तो उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया गया। छात्रों की आवाज दबाने के लिए गार्ड ने छात्रों की पिटाई कर दी। हॉस्टल के वार्डन और गार्ड ने मारपीट कर चुप रहने का दबाव बनाया। इसके बाद छात्रों का गुस्सा भड़क गया और हालात बिगड़ गए। वहीं, छात्रों की बार-बार शिकायत के बाद भी यूनिवर्सिटी प्रशासन का कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला तो हालात बिगड़ गए। छात्रों ने आगजनी और तोड़फोड़ कर दी। छात्रों ने एम्बुलेंस और विभिन्न वाहनों में भी जमकर तोड़फोड़ की थी।
सूचना मिलते ही स्थानीय थाने और आसपास के दूसरे थानों का बल मौके पर पहुंचा, पुलिस और प्रशासन की टीम भी पहुंची, प्रशासन द्वारा बच्चों को उचित संदेश दिए गए। साथ ही साथ मैनेजमेंट से भी चर्चा कर समाधान के प्रयास किए गए। वर्तमान स्थिति पूरी तरह काबू में है। पुलिस बल मौके पर उपस्थित है।
छात्रों का कहना है कि कॉलेज प्रबंधन ने सभी स्टूडेंट्स को पांच दिनों की छुट्टी दे दी है, साथ ही जिन्होंने भी तोड़फोड़ की है, उनके ऊपर कड़ी कार्रवाई की भी बात कही है। प्रबंधन ने कहा है कि जो भी पानी के सैंपल इकट्ठा किए गए हैं, उसकी जांच की जाएगी। प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स की संख्या तक़रीबन तीन से चार हज़ार थी। तोड़फोड़ में एक बस, दो चार पहिया वाहन, एक एम्बुलेंस, हॉस्टल की खिड़कियों के शीशे, एक आरओ प्लांट और कैंपस के दूसरे कुछ हिस्सों को नुक़सान पहुंचा है।
छात्रों का दावा है कि ख़राब पानी और खाने के कारण बीते कुछ दिनों में दो से तीन सौ बच्चे बीमार हो गए थे।
वहीं कॉलेज के रजिस्ट्रार केके नायर का कहना है कि पिछले दिनों लगभग दो दर्जन छात्रों में पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दिए थे। रोज़ाना दो से तीन छात्रों को इस तरह की शिकायतें आ रही थीं। हमारे हॉस्टल में कुल 12,000 छात्र रहते हैं और जिन छात्रों ने हल्की थकान या पीलिया के लक्षण बताए, उन्हें पहले कॉलेज डिस्पेंसरी में उपचार दिया गया और इसके बाद एहतियातन चिरायु अस्पताल भेजा गया। सभी छात्र अब चिरायु अस्पताल से डिस्चार्ज होकर वापस आ चुके हैं।
केके नायर ने आगे बताया कि बीती रात कुछ भ्रामक और शरारती व्हाट्सऐप संदेश फैलाए गए, जिनमें “दावा किया गया कि तीन छात्रों की मौत हो गई है और सैकड़ों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिसके बाद विरोध करने की बातें भी फैलाई गईं। इसी संदेश के बाद छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए और उनमें से कुछ शरारती तत्वों ने पहले कॉलेज में तोड़फोड़ की, उसके बाद कॉलेज के कैंपस में गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।
