KDMC चुनाव में 22 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के खिलाफ शिकायत

 

महाराष्ट्र में इस समय 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। चुनाव प्रचार अपने शबाब पर है। इस बीच ठाणे जिले के कल्याण-डोम्बिवली महापालिका (KDMC) चुनाव में 22 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुन लिए गए। मतदाता आश्चर्यचकित हैं। ऐसे में यहां के समाजसेवक विवेक पांडेय ने सम्बंधित विभागों में शिकायत कर इसकी जांच की मांग की है।

बता दें कि पूरे महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ गठबंधन के 68 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। जिनमें भाजपा के 44, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 22 और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के 2 उम्मीदवार शामिल हैं। एक निर्दलीय उम्मीदवार भी निर्विरोध चुना गया है। इनमें से 22 उम्मीदवार KDMC (15 भाजपा के तो 7 शिंदे की शिवसेना) में चुने गए हैं। विवेक पांडेय ने सभी 22 वार्डों में दोबारा चुनाव कराने की मांग की है। साथ ही कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।

विवेक पांडेय ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि नाम वापसी स्वैच्छिक नहीं थी, बल्कि ‘व्यवस्थित दबाव, धमकियों और अवैध प्रलोभनों’ का परिणाम थी। उम्मीदवारों को दबाव, धमकी, पुलिस तंत्र के दुरुपयोग और आर्थिक प्रलोभनों के ज़रिए नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया गया, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 243-जेडए के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी जनादेश का उल्लंघन है। विवेक पांडेय ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन का इस्तेमाल सत्ताधारी गठबंधन के उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत को सुविधाजनक बनाने के लिए किया गया था।

विवेक पांडेय ने मांग की है कि एकमात्र उम्मीदवार वाले वार्डों में भी मतदान कराया जाए और NOTA को मान्य विकल्प माना जाए। विवेक पांडेय का कहना है कि निर्विरोध चुनावों की यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

विवेक पांडेय ने शिकायत में जनता के बीच बढ़ती अशांति और असंतोष की ओर भी इशारा किया है, जिसमें कहा है कि कई सामाजिक रूप से जागरूक मतदाता इसी मुद्दे पर उच्च न्यायालय का रुख करने के इच्छुक हैं। विवेक पांडेय ने जनता से अपील की है कि वे लोकतान्त्रिक तरीके से इसका विरोध करें।

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) सहित 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं और मतगणना 16 जनवरी को निर्धारित है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा चुनाव कानून के तहत नामांकन वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद नये नामांकन स्वीकार नहीं किये जा सकते। न ही केवल नामांकन वापसी के आधार पर निर्वाचित उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराया जा सकता है।

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