लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने माना- ऑपरेशन सिंदूर था बहुत बड़ा हमला, अल्लाह ने हमें बचा लिया

 

पाकिस्तान के सबसे बड़े आतकंवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के शीर्ष कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने मुरीदके स्थित मरकज़-ए-तैयबा में 29वें दीक्षांत समारोह में भारत के ऑपरेशन सिंदूर को “बड़ा हमला” करार दिया है। हाफिज अब्दुल रऊफ ने क़ुबूल किया कि- ऑपरेशन सिंदूर” सबसे बड़ा हमला था, लेकिन अल्लाह ने हमें बचा लिया।

अप्रैल 2025 में भारत के पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26 पर्यटकों की हत्या कर दी थी। इसके बदले भारत ने 6-7 मई को ऑपरेशन सिन्दूर चलाया था। भारत ने इस ऑपरेशन सिन्दूर में पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए थे, जिसमें LeT का मुख्यालय मरकज़-ए-तैयबा (मुरिदके) और जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर में ठिकाना शामिल था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन हमलों में LeT और JeM के कई शीर्ष आतंकी मारे गए, जिनमें मुरीदके के प्रमुख मुदस्सर खडियान खास (अबू जंदाल) जैसे आतंकी शामिल थे। भारत ने पाकिस्तान के 11 आर्मी बेस को भी ब्रह्मोस मिसाइल हमले में उड़ा दिया था।

अमेरिका द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित लश्कर का शीर्ष कमांडर अब्दुल रऊफ हाफिज सईद का करीबी सहयोगी माना जाता है। इसी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए आतंकियों के जनाजे की अगुवाई की थी। उस जनाजे में पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिससे पाकिस्तान की आतंकवादियों से सांठगांठ उजागर हुई। रऊफ ने भाषण में कहा, “6-7 मई को मुरीदके में जो हुआ, वह बहुत घातक था।…मस्जिद को निशाना बनाकर ध्वस्त किया गया। यह बड़ा हमला था, लेकिन अल्लाह ने हमें बचा लिया।

हाफिज अब्दुल रऊफ ने ये भी सार्वजनिक कबूलनामा किया कि पहलगाम हमले में पाकिस्तानी आतंकियों ने चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया था। भारत ने पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए इसी आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, जिसमें लश्कर के आतंकियों ने टीआरएफ का चोला ओढ़कर 26 निर्दोष नागरिकों की बेहरमी से हत्या की थी। जांच में पता चला था कि आतंकियों ने चीनी हथियारों और उपकरणों का इस्तेमाल किया था। अब रऊफ ने माना है कि उस दौरान पाकिस्तान और लश्कर के आतंकियों ने चीनी हथियारों का सहारा लिया था।

लश्कर कमांडर अब्दुल रऊफ का ये विस्फोटक कबूलनामा पाकिस्तान सरकार के उस दावे की पोल खोलता है, जिसमें वह खुद को आतंकवाद पीड़ित बताता है। ये कबूलनामा किसी खुफिया रिपोर्ट या सरकारी ब्रीफिंग से नहीं बल्कि खुद एक आतंकी सरगना के मुंह से निकला है। अब पाकिस्तान को यह समझाना मुश्किल होगा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद वह अपनी धरती पर आतंकियों को जिहाद की खुली छूट कैसे और क्यों दे रहा है।

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