भाजपा के ‘धुरंधर’ देवेंद्र फड़णवीस, महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव में महायुति की भारी जीत

 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने बृहन्मुम्बई महानगर पालिका (BMC) और अन्य निगमों के चुनावों से पहले कहा था, “मुझे पूरा विश्वास है कि हम अपना ही रिकॉर्ड तोड़ देंगे और सच में ऐसा हो गया है।” वो भी तब हुआ है जब 20 साल बाद ठाकरे परिवार के अलग हो चुके चचेरे भाई फिर से साथ आए और मराठी वादों को फिर से उठाया। लेकिन 16 जनवरी को, जब चुनाव का रिजल्ट आया तो चतुर देवेंद्र फड़णवीस ने भाजपा के लिए एक बड़ी जीत दिला दी। देवेंद्र फड़णवीस की ये सफलता फिल्म ‘धुरंधर’ जैसी सफलता थी और जिससे अब देवेंद्र फड़णवीस भाजपा के धुरंधर बन गए हैं।

एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ मिलकर भाजपा को महाराष्ट्र में सत्ता में लाने के एक साल से कुछ अधिक समय बाद, देवेंद्र फड़णवीस ने जमीनी स्तर पर भी अपनी जबरदस्त लोकप्रियता साबित कर दी है। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में भाजपा को मिली बड़ी जीत है, जिसने एशिया के सबसे धनी नगर निकाय पर ठाकरे परिवार के लगभग तीन दशक के प्रभुत्व का आज अंत कर दिया है।

साल 2017 तक, भाजपा अविभाजित शिवसेना के साथ छोटे भाई के रूप में सहयोगी रही, जिसने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के नगर निगम पर अपना दबदबा बनाए रखा था। अब, भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के साथ, वह अंततः ‘बड़े भाई’ की भूमिका में होगी और पहली बार उसका अपना मेयर होगा। इससे 54 वर्षीय देवेंद्र फड़णवीस महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे शक्तिशाली नेता के रूप में स्थापित हो गए हैं। वे भाजपा के धुरंधर बन गए हैं।

देवेंद्र फड़णवीस एक ऐसे जुझारू नेता बनकर उभरे हैं, जिसने असफलताओं के बावजूद मेहनत किया और पार्टी को इस मुकाम तक पहुंचाया। पहली बार 2019 में सत्ता खोने के बाद, जब शिवसेना ने कांग्रेस और NCP के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। दूसरी बार, 2022 में भाजपा द्वारा एकनाथ शिंदे के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने के बाद, उन्होंने एक कदम पीछे हटकर उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार किया था और तब देवेंद्र फड़णवीस ने भाजपा की जमीनी उपस्थिति को मजबूत किया। उन्होंने मुंबई और उसके उपनगरों में भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ाया और चुपचाप आगामी नगर निगम चुनावों की नींव रखी।

उन्होंने न केवल गुजराती और उत्तर भारतीय मतदाताओं के बीच भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत किया, बल्कि दक्षिण भारतीयों से भी संपर्क साधा। देवेंद्र फड़णवीस ने ठाकरे परिवार की मराठी वोट बैंक पर पकड़ को कमजोर करने का भी प्रयास किया, खुद को एक सशक्त ‘मराठी मानुष’ के रूप में पेश किया और वादा किया कि मुंबई का अगला मेयर एक मराठी हिंदू होगा। और जब समय आया, तो उन्होंने अपना वादा निभाया।

BMC और अन्य निगमों में भाजपा को जीत दिलाने में देवेंद्र फड़णवीस का नेतृत्व निःसंदेह उनके राजनीतिक करियर का एक ऐतिहासिक क्षण होगा। उन्होंने मुंबई में ठाकरे परिवार के गढ़ को तोड़कर असंभव को संभव कर दिखाया। इससे 2029 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए उनकी और भाजपा की संभावनाओं को मजबूती मिलेगी।

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