महाराष्ट्र में ‘लव जिहाद’ विरोधी कानून का मसौदा तैयार, गृह और विधि विभागों के बीच परामर्श जारी

 

महाराष्ट्र सरकार द्वारा जबरन धार्मिक धर्मांतरण के मामलों से निपटने के उद्देश्य से प्रस्तावित धर्मांतरण-विरोधी कानून का पहला मसौदा तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के नेता ऐसे मामलों को अक्सर “लव जिहाद” बताते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस “प्रारंभिक” मसौदे को प्रक्रिया के तहत सुझाव और प्रतिक्रिया के लिए विधि एवं न्याय विभाग को भेजा गया है।

सूत्रों का कहना है कि मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया अभी जारी है और विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले गृह विभाग और विधि एवं न्याय विभाग के बीच और चर्चाएं होंगी। एक सूत्र ने कहा, “किसी भी कानून की तरह इसे अंतिम रूप देने से पहले कई दौर की चर्चा होगी।” सरकार इस वर्ष इस विधेयक को सदन में पारित कराने का लक्ष्य रखे हुए है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में भाजपा शासित राज्य गुजरात ने अपने विवाह पंजीकरण कानून में संशोधन पेश करते हुए अभिभावकों की सहमति अनिवार्य कर दी है। पिछले सप्ताह गुजरात विधानसभा में उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने कहा कि “लव जिहाद के नाम पर राज्य में एक खेल खेला जा रहा है” और “युवतियों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करने की आवश्यकता है।”

इसी बीच, धर्मांतरण-विरोधी कानूनों का मुद्दा सोमवार को सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। अदालत ने 12 राज्यों द्वारा बनाए गए धर्मांतरण-विरोधी कानूनों की वैधता की जांच करने का निर्णय लिया। ईसाई संगठनों ने दलील दी कि ये कानून ‘भीड़तंत्र’ समूहों को अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के लिए “प्रोत्साहित” करते हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने विधि एवं न्याय मंत्रालय के माध्यम से केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, साथ ही हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड और राजस्थान को भी नोटिस भेजा।

इससे पहले भी महाराष्ट्र सरकार धर्मांतरण-विरोधी विधेयक लाने के संकेत दे चुकी है। जबरन धर्मांतरण और “लव जिहाद” कहे जाने वाले मामलों के कानूनी पहलुओं की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी। अब सूत्रों का कहना है कि प्रक्रिया वादों और चर्चाओं से आगे बढ़ चुकी है और प्रस्तावित कानून का मसौदा तैयार किया जा रहा है।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली भाजपा-नीत महायुति सरकार ने “लव जिहाद” या “जबरन धार्मिक धर्मांतरण” के खिलाफ कानून बनाने की अपनी प्रतिबद्धता बार-बार दोहराई है।

इससे पहले देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि उनकी सरकार अंतरधार्मिक विवाहों के खिलाफ नहीं है, लेकिन अत्याचार और धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा था, “जहां विवाह दबाव, झूठी पहचान और धार्मिक धर्मांतरण तथा उत्पीड़न के उद्देश्य से किए जाते हैं, वहां उन्हें कानून के माध्यम से सख्ती से निपटाया जाना चाहिए।”

प्रस्तावित कानून के विरोध के बावजूद और अपने चुनावी वादे के अनुरूप देवेंद्र फडणवीस सरकार ने फरवरी 2025 में एक सरकारी संकल्प (जीआर) जारी कर “लव जिहाद” मामलों पर अंकुश लगाने के लिए कानून बनाने की मंशा जताई थी। इस संबंध में राज्य सरकार ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति गठित की है, जो कानूनी प्रावधानों की समीक्षा करेगी, विधिक ढांचा तैयार करेगी और भाजपा-शासित राजस्थान जैसे अन्य राज्यों के समान कानूनों का अध्ययन करेगी, जहां पिछले वर्ष विधानसभा में धर्मांतरण-विरोधी कानून पेश किया गया था।

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