748 करोड़ रुपये के बैंकिंग घोटाले में हरियाणा में दो IAS अधिकारी निलंबित

 

हरियाणा सरकार ने गुरुवार को दो IAS अधिकारियों- 2011 बैच के प्रदीप कुमार और 2012 बैच के राम कुमार सिंह- को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। हालांकि दोनों अधिकारियों के निलंबन का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया लेकिन माना जा रहा है कि यह कार्रवाई निजी क्षेत्र के बैंकों—IDFC First, AU Small Finance और Kotak Mahindra—द्वारा सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और गबन की चल रही जांच से जुड़ी है।

इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बुधवार रात दो अलग अलग आदेश जारी किए।

अधिकारियों के अनुसार, प्रदीप कुमार 31 अगस्त 2022 से 10 दिसंबर 2025 तक हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) में सदस्य सचिव के पद पर रहे, और इस अवधि के बैंकिंग लेनदेन की जांच की जा रही है। वहीं राम कुमार सिंह 10 जुलाई 2025 से 28 जनवरी 2026 तक पंचकूला नगर निगम के आयुक्त रहे, जिस दौरान शहरी स्थानीय निकाय में कथित रूप से धन का गबन हुआ।

निलंबन से पहले, प्रदीप कुमार राज्य परिवहन निदेशक के पद पर और राम कुमार सिंह राजस्व विभाग में विशेष सचिव एवं पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी में अतिरिक्त CEO के पद पर तैनात थे।

निलंबन अवधि के दौरान, दोनों अधिकारियों को ऑल इंडिया सर्विसेज (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम 4 के तहत जीवन निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) दिया जाएगा, और उनका मुख्यालय चंडीगढ़ स्थित हरियाणा के मुख्य सचिव (सर्विसेज-I शाखा) का कार्यालय रहेगा।

यह घोटाला कुल 748 करोड़ रुपये के बहु-स्तरीय वित्तीय धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें मुख्य रूप से निजी बैंकों के जरिए सरकारी धन का अवैध रूप से डायवर्जन किया गया। सबसे बड़ा हिस्सा 590–597 करोड़ रुपये के गबन का है, जिसमें IDFC First Bank और AU Small Finance Bank शामिल हैं। इसमें विभिन्न विभागों, जैसे हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के लिए रखी गई रकम को स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया और इसका उपयोग लग्जरी संपत्तियों और रियल एस्टेट में किया गया।

दूसरा घोटाला 150–158 करोड़ रुपए का है, जो Kotak Mahindra Bank से जुड़ा है। इसमें पंचकूला नगर निगम के अधिकारियों पर फर्जी मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर अनधिकृत खाते खोलने और समय से पहले FD तोड़ने का आरोप है।

ये अनियमितताएं जुलाई 2025 से फरवरी 2026 के बीच अलग-अलग चरणों में सामने आईं। शुरुआत में तब संदेह हुआ जब शहरी स्थानीय निकाय और विकास एवं पंचायत विभाग जैसे विभागों ने खातों को बंद करने या FD बैलेंस की पुष्टि करने की कोशिश की, और उन्हें फर्जी बैंक स्टेटमेंट तथा गायब धनराशि का पता चला।

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