राजेन्द्रसिंह भुल्लर ‘महाराज’
अकेला
सरकार फिल्म का डायलॉग है- “मुझे जो सही लगता है मैं करता हूँ। चाहे वह भगवान के खिलाफ हो, समाज के खिलाफ हो, पुलिस, कानून या फिर पूरे सिस्टम के खिलाफ क्यों न हो।” अंदर की बात है कि फिल्म प्रोड्यूसर ने यह डायलॉग उल्हासनगर के नेताओं, नगरसेवकों, गुंडों, बिल्डरों और भू-माफियाओं से इंस्पायर्ड होकर लिखा था। डायलॉग बड़े कलाकार अमिताभ बच्चन के मुंह से निकला था इसलिए अच्छा लगा था, लेकिन उल्हासनगर के नेता, नगरसेवक, गुंडे, बिल्डर और भू-माफिया इस प्रकार की नीच हरकत करते हैं- जो सरकार के खिलाफ होता है, जो पूरे सिस्टम के खिलाफ होता है। आरक्षित भूखंड पर बिल्डिंग बनाना इनका शगल है। सहूलियत भी है। अब उल्हासनगर में एक ऐसे भूखंड पर बिल्डिंग बन गई जो भूखंड बेघर के लिए घर के लिए आरक्षित था।
यह बिल्डिंग किसी टी. टी. पारवानी (पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी धारक) ने जय गणेश कंस्ट्रक्शन के बैनर तले (सीटीएस नंबर- 8666(ब), प्लॉट नंबर- 618 (भा), 619 (भा), यू नंबर- 28, सीट नंबर- 75 व 76), टेलीफोन एक्सचेंज के सामने, राहुल नगर, उल्हासनगर-1 में बना ली। इसके लिए उल्हासनगर महानगरपालिका ने परमीशन (जा.क्र.उमपा/नरवि/बां.प.72/99/561/दि.3/2/2023) भी दी। उमपा आयुक्त और उमपा प्रशासन को गुमराह कर इस अवैध निर्माण के लिए आर्किटेक्ट अविनाश पारवानी, टाऊन प्लानर प्रकाश मुले, मालिक हीरू मामा मढ़वी और जूनियर इंजीनियर ने परमीशन हासिल कर ली।
बता दें कि विकास योजना-1974 के अनुसार उक्त भूखंड बेघर के लिए घर के लिए आरक्षित था। उल्हासनगर में एक गैंग काम करती है जो रिजर्व्ड प्लॉट पर से रिज़र्वेशन हटवाती है। इसके लिए बड़ी रकम चुकानी पड़ती है। इस गैंग ने इस प्लॉट के लिए भी राज्य सरकार (मंत्रालय) से निर्माण की परमीशन टीपीएस/1094/सीआर-14/94/एनवी-9, मंत्रालय, मुंबई-32/दि.7/४/1994) हासिल कर ली। महाराष्ट्र सरकार के आदेश (क्रमांक- टीपीएस/1200/135/प्र.क्र. 226 नगरविकास विभाग, मंत्रालय, मुंबई/दि. 22/11/2002) के आधार पर उल्हासनगर महापालिका प्रशासन ने हीरू मामा मढ़वी को संशोधित परमीशन (उमपा/नरवि/बांप/39/99/399/दि.27/11/2006) भी दे दी।
महत्वपूर्ण है कि ग्राउंड फ्लोर प्लस दो फ्लोर मिलाकर कुल 293.79 वर्ग मीटर एरिया डेवलपर को महापालिका प्रशासन को हैंडओवर करना था। लेकिन डेवलपर ने महापालिका प्रशासन को हैंडओवर नहीं किया। मजेदार बात है कि महापालिका प्रशासन ने उक्त एरिया को लेने के लिए डेवलपर और आर्किटेक्ट को कई दफा पत्र भी लिखा लेकिन उन्होंने महापालिका प्रशासन के पत्र को कूड़े में डाल दिया। इट हैपेन्स ओनली इन उल्हासनगर !
एक और बात पहले के प्रस्ताव में डेवलपर ने 293.79 वर्ग मीटर में निर्माण करने की परमीशन ली थी लेकिन संशोधित परमीशन में यह एरिया 299.36 वर्ग मीटर कर ली।
शिवसेना के वरिष्ठतम नगरसेवक और नेता राजेन्द्रसिंह भुल्लर ‘महाराज’ ने महापालिका आयुक्त को शिकायती पत्र लिखकर महाराष्ट्र नगररचना अधिनियम-1966 की धारा 51 के अनुसार निर्माण की परमीशन रद्द करने और उक्त भूखंड को अपने कब्जे में लेने की मांग की है।
