मालेगाँव ब्लास्ट-भगवा आतंकवाद, भाग -6 : ACP शेखर बागड़े ने MI इन्फॉर्मर सुधाकर चतुर्वेदी के घर में रखा था RDX !

शेखर बागड़े

अकेला

शेखर बागड़े वर्तमान में ठाणे पुलिस की क्राइम ब्रांच में सहायक आयुक्त (ACP) के पद पर कार्यरत है। घटना के दौरान वह महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) में सहायक पुलिस निरीक्षक (API) था। अकेला ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (ABI) के पास इस बात के प्रमाण हैं कि मालेगाँव बम ब्लास्ट में गिरफ्तार सुधाकर चतुर्वेदी के घर में RDX और अन्य विस्फोटक शेखर बागड़े ने रखा था। शेखर बागड़े ने ऐसा इसलिए किया था जिससे सुधाकर चतुर्वेदी को गिरफ्तार किया जा सके और और कर्नल प्रसाद पुरोहित का इन्कॉउंटर किया जा सके।

इस सीरीज़ के भाग-5 में मैंने 3 नवम्बर 2008 की तारीख का विशेष रूप से उल्लेख किया था। यह भी लिखा था कि 3 नवंबर 2008 को ध्यान में रखना भाग-6 में इस तारीख की विशेष भूमिका होगी। शेखर बागड़े तब महाराष्ट्र ATS में API के पद पर था। बात विशेष यह है कि 3 नवम्बर 2008 को शेखर बागड़े ने मिलिट्री के सूबेदार केशव कारभारी पवार उर्फ़ केके पवार को फोन किया। केशव पवार देवलाली कैम्प, नासिक में पोस्टेड थे। चूँकि केके पवार की पोस्ट सूबेदार की थी तो उन्हें शॉर्ट में सूबेदार पवार भी बुलाते थे। शेखर बागड़े ने केशव पवार से सुधाकर चतुर्वेदी के घर का पता पूछा। केशव पवार ने शेखर बागड़े से कहा कि वे थोड़ी देर में बताते हैं। केशव पवार ने तब अपने बॉस कर्नल प्रवीण माधव ख़ानज़ोड़े को इन्फॉर्म किया कि शेखर बागड़े सुधाकर चतुर्वेदी के घर का पता पूछ रहा है। प्रवीण ख़ानज़ोड़े ने तुरंत अपने कमांडिंग ऑफिसर को इन्फॉर्म किया कि API शेखर बागड़े केशव पवार से सुधाकर चतुर्वेदी के घर का पता पूछ रहा है। कमांडिंग ऑफिसर (हेडक्वार्टर) से हरी झंडी मिलने के बाद माधव ख़ानज़ोड़े ने केशव पवार से कहा कि शेखर बागड़े को सुधाकर चतुर्वेदी के घर का पता बता दो। इस पर केशव पवार ने शेखर बागड़े को फोन किया और सुधाकर चतुर्वेदी के घर का पता लेने को कहा। परन्तु शेखर बागड़े ने केशव पवार को बताया कि उनके सुपीरियर (शायद हेमंत करकरे) का फोन आया था। हेमंत करकरे ने कहा कि सुधाकर चतुर्वेदी के घर का पता नहीं चाहिए।

केशव पवार और माधव ख़ानज़ोड़े मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) में कार्यरत थे। इनका काम खुफिया इन्फॉर्मेशन कलेक्ट करना था। माधव ख़ानज़ोड़े को कुछ शक हुआ। वे केशव पवार को लेकर अपने स्कूटर से सुधाकर चतुर्वेदी के घर गए। वहां दोनों ने देखा कि सुधाकर चतुर्वेदी के घर का दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ था। माधव ख़ानज़ोड़े स्कूटर पार्क करने लगे तो केशव पवार सुधाकर चतुर्वेदी के घर में दाखिल हो गए। केशव पवार शॉक्ड रह गए। उन्होंने देखा कि शेखर बागड़े फ्लोर पर कुछ रगड़ रहा था। पास में एक बैग भी पड़ा हुआ था। यह दृश्य बताने के लिए केशव पवार माधव ख़ानज़ोड़े के पास आ गए तो पीछे-पीछे शेखर बागड़े भी आ गया। केशव पवार कुछ बताते, इसके पहले शेखर बागड़े ने हाथ जोड़कर दोनों से कहा कि यह बात किसी को बताना नहीं। नहीं तो उसकी नौकरी चली जाएगी। शेखर बागड़े काँप रहा था।

सुधाकर चतुर्वेदी को मालेगाँव बम ब्लास्ट में गिरफ्तार किया गया था। वे 11 नंबर के आरोपी थे। उनके घर से RDX और अन्य विस्फोटक सामग्री की बरामदगी दिखाई गयी थी। ABI के पास इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि सुधाकर चतुर्वेदी MI के लिए इन्फॉर्मर का काम करते थे। वे MI के पे रोल पर थे। उनको MI इन्फॉर्मर का पहचान पत्र भी दिया गया था। सुधाकर चतुर्वेदी, केशव पवार, माधव ख़ानज़ोड़े पॉलिटिकल मूवमेंट्स, पॉलिटिकल एक्टिविटीज और एंटी नेशनल एक्टिविटीज़ की इन्फॉर्मेशन कलेक्ट करते थे। सुधाकर चतुर्वेदी के जिस घर में शेखर बागड़े ने RDX रखा था उसका किराया MI देती थी।

अब सबसे बड़ी बात। इधर 3 नवम्बर 2008 को सुधाकर चतुर्वेदी के देवलाली के घर में शेखर बागड़े ने शाम को RDX और अन्य विस्फोटक सामग्री प्लांट की। उधर हेमंत करकरे ने कर्नल प्रसाद पुरोहित का खंडाला में इन्कॉउंटर की तैयारी कर रखी थी। कर्नल प्रसाद पुरोहित के इन्कॉउंटर में मारे जाने के बाद हेमंत करकरे यह प्रू कर देते कि देखिये यही विस्फोटक कर्नल प्रसाद पुरोहित ने मालेगाँव ब्लास्ट में यूज़ किया गया था। कर्नल प्रसाद पुरोहित के इन्कॉउंटर में मारे जाने और सुधाकर चतुर्वेदी की गिरफ़्तारी को भी हेमंत करकरे कनेक्ट करके जस्टिफाय कर देते।

बिल्कुल ऐसी ही घटना याद कीजिये। देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अम्बानी के घर के पास मुंबई पुलिस के API सचिन वझे ने अपने दोस्त मनसुख हिरण की विस्फोटक भरी कार पार्क की। जब भेद खुलने की नौबत आ गयी तो मनसुख हिरण की हत्या कर शव खाड़ी में फेंक दी। सचिन वझे यह शो करना चाहता था कि जब मनसुख हिरण को लगा कि वह पकड़ा जाएगा तो उसने आत्महत्या कर ली। चैप्टर क्लोज्ड। सचिन वझे मुंबई पुलिस का सबसे बड़ा करप्ट ऑफिसर था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं और तात्कालिक होम मिनिस्टर अनिल देशमुख का आशीर्वाद उसे क्राइम करने के लिए प्रेरित करते थे। परन्तु NIA की एंट्री ने सब गुड़ गोबर कर दिया। इधर शेखर बागड़े भी कम (डॉट. डॉट. डॉट.) अधिकारी नहीं है। यह बहुत ‘इंटेलिजेंट’ भी है। सुधाकर चतुर्वेदी ने अपनी गिरफ़्तारी के समय अपने घर का पता ATS को दिया था लेकिन शेखर बागड़े ने MI सूबेदार केशव पवार से फोन पर पता पूछने की ‘इंटेलिजेंसी’ दिखा दी। । यहीं से भेद खुल गया। शेखर बागड़े अभी उप मुख्यमंत्री, तब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का आदमी माना जाता है। इसलिए कुछ भी करता है। यह डोम्बिवली की मानपाड़ा पुलिस स्टेशन का सीनियर इन्स्पेक्टर था।

डोम्बिवली की एक महिला ने एक युवक के खिलाफ शेखर बागड़े से कोई शिकायत की। महिला अगर खूबसूरत हो और अवैध धंधा करती हो तो पुलिस ऑफिसर की मर्दानगी ज़्यादा जाग जाती है। शेखर बागड़े ने उस युवक को अपनी केबिन में बुलवाया। महिला भी केबिन में थी। शेखर बागड़े ने उस युवक को एक थप्पड़ मार दिया। थप्पड़ इतना ज़ोरदार था कि युवक जमीन पर गिर गया। मर गया। चूँकि शेखर बागड़े मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अथवा उनके सांसद पुत्र श्रीकांत शिंदे का आदमी था, इसलिए उसका कुछ भी नहीं उखड़ा। सचिन वझे V/S मनसुख हिरण की तरह चैप्टर क्लोज़्ड।

मुंबई से 200 किलोमीटर दूर नासिक जिले के उपनगर मुस्लिम बहुल इलाके मालेगाँव में 29 सितम्बर 2008 को एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में बम ब्लास्ट हो गया था। इस ब्लास्ट में 6 लोग मारे गए थे और लगभग 100 लोग घायल हो गए थे। क्रमशः …

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