रूपाली चाकणकर
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग (MSCW) की पूर्व अध्यक्ष और NCP नेता रूपाली चाकणकर की बहन प्रतिभा चाकणकर से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को पूछताछ की। यह पूछताछ नासिक स्थित एक सहकारी क्रेडिट सोसाइटी के चार खातों के संबंध में की गई, जो गिरफ्तार तांत्रिक अशोक खरात से जुड़े बताए जा रहे हैं। ED के अनुसार ये खाते प्रतिभा और उनके बेटे के नाम पर हैं, लेकिन इनका नियंत्रण अशोक खरात के पास था।
ED की जांच में सामने आया है कि केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी करने के लिए इस्तेमाल की गई जानकारी में अशोक खरात का फोन नंबर भी शामिल था। ये चारों खाते नासिक की समता नगरी सहकारी पतसंस्था में हैं।
प्रतिभा चाकणकर का बयान ED द्वारा खरात के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत दर्ज किया गया। अशोक खरात पर बलात्कार, यौन शोषण, धार्मिक छल और धोखाधड़ी जैसे आरोप भी दर्ज हैं। ED ने इन चार खातों के संबंध में प्रतिभा के बेटे को भी पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वह अभी तक पेश नहीं हुआ है। प्रतिभा चाकणकर ने किसी भी तरह की गलत गतिविधि से इन्कार किया है।
ED उस बड़ी नकदी की जांच कर रही है, जो कथित तौर पर क्रेडिट सोसाइटी में खरात द्वारा नियंत्रित 60 खातों में जमा की गई थी। बताया जाता है कि एपी बावके, जो अशोक खरात का सहयोगी माना जा रहा है, नकद जमा करते समय खाताधारकों के साथ मौजूद रहता था।
अधिकारियों के अनुसार, इन 60 खातों से जुड़े सभी लेन-देन की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या ये मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपराध से प्राप्त धन से जुड़े हैं। अदालत की अनुमति के बाद ED ने एपी बावके का बयान भी दर्ज किया। अहिल्यानगर जिले की जेल में बंद एपी बावके ने कथित तौर पर ED को बताया कि वह केवल अशोक खरात के निर्देशों का पालन कर रहा था और उसने किसी भी गलत काम से इन्कार किया।
रूपाली चाकणकर ने अशोक खरात से कथित संबंधों के आरोप लगने के बाद MSCW अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। अशोक खरात को मार्च में नासिक में बलात्कार, यौन शोषण, अंधविश्वास फैलाने, वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच 6 अप्रैल को शुरू हुई और महाराष्ट्र भर में उससे जुड़े कई स्थानों पर छापे मारे गए।
जांच में यह संकेत मिला है कि अशोक खरात ने नासिक की दो सहकारी क्रेडिट सोसाइटी में कई खातों को नियंत्रित किया हुआ था। ये खाते भले ही अन्य लोगों के नाम पर थे, लेकिन सभी मामलों में अशोक खरात को नामांकित (नॉमिनी) बनाया गया था और उसका मोबाइल नंबर इन खातों से जुड़ा हुआ था, जिससे वह उन्हें नियंत्रित कर सकता था। ED इन खातों के लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है।
अप्रैल में ED ने नासिक, पुणे और शिरडी में अशोक खरात, उसके रिश्तेदारों और सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान लगभग 2.4 करोड़ रुपये की बैंक राशि फ्रीज की गई, 42 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी जब्त की गई और कई करोड़ रुपये मूल्य के करीब 90 संपत्ति दस्तावेज बरामद किए गए।
ED के अनुसार जांच के दायरे में आए चार खातों में से दो बचत खातों में 50 लाख रुपये (प्रत्येक में 25 लाख रुपये) जमा किए गए थे। बाद में यह राशि अन्य दो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खातों में स्थानांतरित की गई। इसके बाद FD खातों से पैसा निकालकर दोबारा उन्हीं बचत खातों में जमा किया गया, जिसमें प्रत्येक में 1 लाख रुपये अतिरिक्त ब्याज भी जोड़ा गया। अंत में इस पूरी राशि को नकद निकाल लिया गया।
