फार्मेसी कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मोंटू पटेल के घर CBI का छापा, मुंबई में महाराष्ट्र स्टेट फार्मेसी कॉउन्सिल में भी घोटाला ही घोटाला, MSPC अध्यक्ष अतुल अहिरे भी नपेंगे

अतुल अहिरे

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को फार्मेसी कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मोंटू पटेल के अहमदाबाद में झुंडाल स्थित बंगले पर छापा मारा। उन पर दिल्ली स्थित अपने कार्यालय और घर पर रिश्वत लेने का आरोप है। इधर ABI (abinewz.com) मुंबई में महाराष्ट्र स्टेट फार्मेसी कॉउन्सिल (MSPC) में व्याप्त भ्रष्टाचार को प्रकाशित कर रहा है। पहली किश्त में आपने पढ़ा कि MSPC नए फार्मासिस्ट से कैसे रजिस्ट्रेशन के नाम पर 2,675 रुपये शुल्क लेकर लूट मचा रखी है। अब पढ़िए कि समय-समय पर इन्कम टैक्स (I-T), सर्विस टैक्स (ST) और GST ने MSPC पर कार्रवाई की है। बावजूद इसके MSPC के वर्तमान अध्यक्ष अतुल अहिरे को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। अतुल अहिरे के मज़े ही मज़े हैं।

पूर्व फार्मासिस्ट, MSPC के पूर्व ज्वाइंट रजिस्ट्रार और अब पेशे से वकील विवेक चौधरी की शिकायत के आधार पर ABI ने 18 जून 2025 को ‘महाराष्ट्र स्टेट फार्मेसी कॉउन्सिल में रजिस्ट्रेशन फीस घोटाला, पूर्व फार्मासिस्ट और ज्वॉइंट रजिस्ट्रार विवेक चौधरी ने की शिकायत’ शीर्षक से पहली खबर प्रकाशित की थी। उसी कड़ी में अब दूसरी खबर पढ़िए कि साल 2003 से 2018 के बीच MSPC ने रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर प्रति फार्मासिस्ट से 500 रुपये सर्विस चार्ज वसूला। सर्विस चार्ज यह कहकर वसूला कि हम सेवा दे रहे हैं। कमाल है कि 100 रुपए रजिस्ट्रेशन शुल्क है तो 50 रुपये वार्षिक रिन्यूअल शुल्क है। MSPC इस 150 रुपये शुल्क के ऊपर 500 रुपये सर्विस चार्ज वसूलती थी। और तो और यह सर्विस चार्ज न तो राज्य सरकार के खाते में जमा करती है और न तो केंद्र सरकार के। सब अपने खाते में जमा करती है।

हिसाब लगाइये कि साल 2003 से अबतक साढ़े तीन लाख फार्मासिस्ट से MSPC करोड़ों रुपये सर्विस चार्ज वसूल चुकी है। इसकी भनक जब सर्विस टैक्स विभाग, इन्कम टैक्स विभाग और GST विभाग को लगी तो सबने MSPC को डिमांड नोटिस भेज दी। इससे विभाग की किरकिरी हो गयी। बहुत बदनामी हो गयी। बताते हैं कि तब MSPC को लगभग 2 करोड़ रुपये सर्विस टैक्स, लगभग 2 करोड़ रुपये GST तथा 4 करोड़ रुपये इन्कम टैक्स भरना पड़ा। कुछ मामलों में कुछ राशि में तो सेटलमेंट भी किया।

इतना सब होने के बावजूद MSPC फिर भी नहीं सुधरी। बस सर्विस टैक्स का नाम बदल कर कॉर्प्स डोनेशन फण्ड (CDF) नाम रख दिया। और वही 500 रुपये की वसूली लगातार कर रही है।

बता दें कि MSPC रूल्स 1969 के तहत MSPC को सिर्फ फार्मासिस्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करने की कानूनन मंजूरी है। बावजूद इसके MSPC गत 20 सालों से आइडेंटिटी कार्ड इश्यू करने का 200 रुपये वसूल कर रही है। आइडेंटिटी कार्ड की क्वालिटी भी कुछ ख़ास नहीं है। एक्सपर्ट बताते हैं कि ऐसा आइडेंटिटी कार्ड मात्र 40 रुपये में बन सकता है। MSPC अबतक लगभग 4 लाख फार्मासिस्ट से प्रति आइडेंटिटी कार्ड 200 रुपये वसूल चुकी है। गणित लगाइये कि MSPC आइडेंटिटी कार्ड के नाम पर कितना बड़ा EXTORTION कर रही है।

MSPC का वैसे तो फुल फॉर्म महाराष्ट्र स्टेट फार्मेसी कॉउन्सिल है लेकिन अवैध उगाही की ऐसी ही हरकतों से फार्मासिस्ट इसे अब महाराष्ट्र स्टेट पापा’ज कॉउन्सिल कहते हैं। इससे इसके अध्यक्ष अतुल अहिरे के मज़े ही मज़े हैं।

नोट : MSPC के अध्यक्ष अतुल अहिरे के अलावा इसके अन्य पदाधिकारियों के किस प्रकार मजे हैं, अवैध उगाही और मुनाफाखोरी के पैसे से किस तरीके से ये सब मज़े कर रहे हैं- पढ़िए अगले अंक में… लगता है मोंटू पटेल की तरह अतुल अहिरे भी नपेंगे

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