‘लिबास’ ब्रांड के फैशन डिज़ाइनर रियाज़ गंजी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

 

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘लिबास’ ब्रांड के फैशन डिज़ाइनर रियाज़ गंजी के खिलाफ संपत्तियों का खुलासा न करने और बकाया राशि का भुगतान न करने से जुड़े अवमानना याचिका मामले में गैर-जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि उनके व्यवहार के लिए उन्हें “कोई सहानुभूति या दया” नहीं मिलनी चाहिए।

न्यायमूर्ति अभय आहुजा की एकल पीठ ने 2 अप्रैल के आदेश में, जिसकी प्रति सोमवार को उपलब्ध कराई गई, रियाज़ गंजी की अनुपस्थिति पर गंभीर आपत्ति जताई। कोर्ट ने पहले उन्हें पेश रहने का निर्देश दिया था, बावजूद इसके वे उपस्थित नहीं हुए। अदालत ने पुलिस को 27 अप्रैल, अगली सुनवाई की तारीख पर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि रियाज़ गंजी का रवैया न्यायिक प्रक्रिया के प्रति अनादर दर्शाता है और इसके लिए उन्हें “कोई सहानुभूति या दया” नहीं मिलनी चाहिए।

पीठ जीएस मैजेस्टिक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लिबास डिज़ाइन्स लिमिटेड और अन्य के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। रियाज़ गंजी लिबास डिज़ाइन्स के प्रबंध निदेशक हैं।

यह विवाद पंजाब के लुधियाना स्थित जीएसएम के ग्रैंड वॉक मॉल में लिबास के फ्रेंचाइज़ी स्टोर से जुड़ा है, जहां से लिबास बिना अनुबंधित बकाया राशि चुकाए परिसर छोड़कर चला गया।

याचिकाकर्ता ने 2 अप्रैल को आरोप लगाया कि प्रतिवादियों ने अदालत के पूर्व निर्देशों के बावजूद अपनी संपत्तियों का पूर्ण और स्पष्ट खुलासा नहीं किया।

हाईकोर्ट ने पाया कि दी गई जानकारी अस्पष्ट थी, जिसमें केवल कुर्ला, पेडर रोड और लुधियाना जैसे स्थानों का उल्लेख था, लेकिन सटीक पते नहीं दिए गए, जिससे संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था।

अदालत ने अपने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि 27 अप्रैल की अगली सुनवाई के लिए रियाज़ गंजी की उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु गैर-जमानती वारंट जारी किया जाए। मुंबई पुलिस को संबंधित पुलिस स्टेशन के माध्यम से इस वारंट को लागू करने का आदेश दिया गया है।

इसके अलावा, कोर्ट ने रियाज़ गंजी, उनकी कंपनी और उसके निदेशकों को अगली आदेश तक किसी भी चल या अचल संपत्ति के लेन-देन या निपटान से रोक दिया है।

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