भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मुंबई के माझगांव कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एजाज़ुद्दीन सलाऊद्दीन काज़ी की संपत्ति के विवरण की ओपन जांच शुरू कर दी है। न्यायाधीश एजाज़ुद्दीन काज़ी के खिलाफ ACB ने भ्रष्टाचार के आरोपों में मामला दर्ज किया है।
बताते हैं न्यायाधीश एजाज़ुद्दीन काज़ी की संपत्ति के विवरण की ओपन जांच शुरू की गई है। हाईकोर्ट की अनुमति के बाद न्यायाधीश एजाज़ुद्दीन काज़ी को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दी गयी थी। 8 दिसंबर को उनका वॉयस सैंपल लिया गया, जिसे जांच के लिए फॉरेंसिक विभाग को भेजा गया है। न्यायाधीश एजाज़ुद्दीन काज़ी ने अपना मोबाइल फोन जांच अधिकारी के सामने पेश किया, जिसके बाद उसे जब्त कर लिया गया। इसके अलावा उनका बयान भी दर्ज किया गया है और 10 दिसंबर को उनके घर की तलाशी भी ली गई।
ACB के अनुसार माझगांव कोर्ट में तैनात स्टेनोग्राफर चंद्रकांत वासुदेव को 10 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप है कि उसने एक संपत्ति विवाद मामले में न्यायाधीश एजाज़ुद्दीन काज़ी से अनुकूल फैसला दिलाने के बदले 15 लाख रुपये की रिश्वत ली।
ACB का कहना है कि यह मामला 9 सितंबर का है, जब शिकायतकर्ता का एक सहयोगी सिविल सेशंस कोर्ट, कोर्ट नंबर 14 में सुनवाई के लिए मौजूद था। उस दौरान चंद्रकांत वासुदेव ने कथित तौर पर कोर्ट के वॉशरूम में उस सहयोगी से संपर्क किया और कहा- साहब (जज) के लिए कुछ करो तो आदेश आपके पक्ष में होगा। बाद में, वासुदेव ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से संपर्क कर उसे एक कैफे में मिलने के लिए कहा, जहां उसने अपने लिए 10 लाख रुपये और न्यायाधीश एजाज़ुद्दीन काज़ी के लिए 15 लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने इस मांग को ठुकरा दिया।
ACB ने आगे आरोप लगाया कि इसके बाद चंद्रकांत वासुदेव ने व्हाट्सऐप के जरिए शिकायतकर्ता के सहयोगी से संपर्क किया और चेतावनी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो आदेश उनके खिलाफ जाएगा। इसके बाद शिकायतकर्ता ने ACB से संपर्क किया। सत्यापन के बाद ACB ने जाल बिछाया और चंद्रकांत वासुदेव को गिरफ्तार कर लिया।
