बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर दो सब इंस्पेक्टर समेत 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

 

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर मुंबई में डेटा चोरी से जुड़े एक जबरन वसूली मामले में दो पुलिस सब-इंस्पेक्टर समेत आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस सब-इंस्पेक्टर की पहचान लक्ष्मण काकड़े (जो फिलहाल नवी मुंबई पुलिस में तैनात हैं) और मनीषा चौगुले (जो खार पुलिस स्टेशन के साइबर सेल से जुड़ी हैं) के रूप में हुई है।

शिकायतकर्ता शुभोजीत डे (30) ठाणे के दिवा के निवासी हैं। वे खार (वेस्ट) स्थित स्पर्श लाइज़न सर्विसेज LLP में एग्जीक्यूटिव के तौर पर कार्यरत थे। यह कंपनी रेस्टोरेंट और बार के लिए विभागीय अनुमति दिलाने का काम करती है।

FIR के अनुसार घटना 16 जुलाई 2024 की है, जब शुभोजीत डे और उनके दो सहयोगियों—शशांक पवार और राज थियर—को कंपनी की सीनियर मैनेजर रसिका भिरवटकर ने डेटा चोरी के आरोप में अपने आधिकारिक और निजी मोबाइल फोन जमा करने के लिए कहा। जब शुभोजीत डे ने अपना निजी फोन देने से इन्कार कर दिया किया तो कंपनी के सह-मालिक इंद्रजीत सिंह ने उन्हें फोन पर गाली दी और धमकाया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि एक अन्य कर्मचारी सचिन केसरकर ने ऑफिस के अंदर उनके एक सहयोगी के साथ मारपीट की।

शुभोजीत डे ने आरोप लगाया कि उनका बैग, जिसमें नकद, दस्तावेज और बैंक कार्ड थे, जबरन रख लिया गया। इसके बाद उन्हें और उनके सहयोगियों को शिकायत के संबंध में खार पुलिस स्टेशन बुलाया गया। पूछताछ के दौरान सब इंस्पेक्टर मनीषा चौगुले ने जबरन उनका निजी मोबाइल एक्सेस किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि साइबर सेल ऑफिस के अंदर, सब इंस्पेक्टर लक्ष्मण काकड़े की मौजूदगी में इंद्रजीत सिंह ने उन्हें बैंक खातों और मोबाइल ऐप्स के पासवर्ड बताने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उनके खाते से कथित तौर पर 1 लाख रुपये एक आरोपी के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए।

शुभोजीत डे ने यह भी दावा किया कि उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर अतिरिक्त 10 लाख रुपये की मांग की गई। आरोपियों ने कथित तौर पर व्हाट्सऐप संदेशों के जरिए उन्हें धोखेबाज बताकर उनकी छवि भी खराब की।

खार पुलिस ने इस मामले में BNS और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज किया है, जिनमें गलत तरीके से बंधक बनाना, जबरन वसूली और बेईमानी से संपत्ति हड़पना शामिल है।
शुभोजीत डे का कहना है कि पुलिस ने शुरुआत में कार्रवाई करने से इन्कार कर दिया था, जिसके बाद उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। आरोपियों में इंद्रजीत सिंह, चंचल सिंह, रसिका भिरवटकर, सचिन केसरकर, मयूर खरपेकर, लक्ष्मण काकड़े और मनीषा चौगुले शामिल हैं।

इस बीच हाईकोर्ट को बताया गया कि डीसीपी (जोन IX) ने जांच को जुहू पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर कर दिया है। कोर्ट ने चार हफ्तों के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है और खार पुलिस को जब्त किए गए मोबाइल फोन याचिकाकर्ताओं की मौजूदगी में जुहू पुलिस को सौंपने का आदेश दिया है।

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