दिल्ली के जामा मस्जिद ब्लास्ट के बाद जिस तरह अल फलाह यूनिवर्सिटी (फरीदाबाद) और महाराष्ट्र की इशातुल उलूम संस्था जांच एजेंसी के रडार पर आई थीं, अब उसी कड़ी में तीसरा नाम राजस्थान के बीकानेर स्थित अलफुर्कान एजुकेशनल ट्रस्ट का जुड़ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजस्थान के बीकानेर के अलफुर्कान एजुकेशनल ट्रस्ट (AET) के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद सदीक उर्फ़ सादिक़ खान को गिरफ्तार किया है। जयपुर ज़ोनल ऑफिस की टीम ने उन्हें PMLA, 2002 के तहत गिरफ्तार कर 04 दिसंबर 2025 को स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने 06 दिसंबर 2025 तक की ED कस्टडी मंज़ूर की है।
ED के अनुसार ट्रस्ट में आने वाला चंदा पूरी तरह कैश में लिया जाता था। न रसीद, न बहीखाता, न ऑडिट- पूरा सिस्टम सादीक़ के हाथ में चलता था। फिर इस कैश का उपयोग ऐसे कामों में होता था जिनका ट्रस्ट के उद्देश्य से कोई लेना-देना नहीं था। इन्हीं पैसों से उन्होंने बांग्लादेश, नेपाल, क़तर और ओमान जैसे देशों की यात्राएँ कीं। ED को संदेह है कि इन यात्राओं का मकसद धार्मिक-सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि ऐसे नेटवर्क से संपर्क बनाना था जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने का काम करते हैं। बांग्लादेश यात्रा के दौरान सादीक़ मो. सलीम उर्फ़ सौरभ वैद्य से मिले, जिसे बाद में MP ATS ने हिज्ब-उत-तहरीर की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। यह संपर्क ED के अनुसार इस नेटवर्क की गंभीरता को साबित करता है। AET का सीरिया कनेक्शन भी जांच का हिस्सा है और एजेंसी यह पता लगा रही है कि ट्रस्ट के जरिए किस स्तर पर चरमपंथी विचारधाराओं को वैचारिक या वित्तीय समर्थन दिया गया। ED का मानना है कि यह मामला सिर्फ फंडिंग का नहीं, बल्कि वैचारिक और आपराधिक गठजोड़ के बड़े खेल का हिस्सा है। आगे की कार्रवाई में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
इस पूरी गिरफ्तारी का सबसे संवेदनशील हिस्सा है जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश। ED की पूछताछ और जांच में सामने आया है कि सदीक ने बांग्लादेश यात्रा के दौरान JMB के सदस्यों से मुलाकात की थी। JMB एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है जिसका मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश में शरिया कानून लागू करना और भारत के पश्चिम बंगाल व असम जैसे राज्यों में अपना नेटवर्क फैलाना है। यह वही संगठन है जिसने 2016 में ढाका के होली आर्टिसन बेकरी पर हमला किया था। लेकिन भारत के लिए आज की तारीख में सबसे बड़ी चिंता यह है कि JMB का प्राइम टारगेट शेख हसीना रही हैं। 2004 में शेख हसीना की रैली पर ग्रेनेड हमला करने के पीछे इसी विचारधारा के लोग थे। JMB ने कई बार हसीना की हत्या की साजिश रची है।
सदीक की प्रोफाइल एक सामान्य अपराधी की नहीं, बल्कि एक ‘ग्लोबल जिहादी’ मानसिकता वाले व्यक्ति की है। ED की रिपोर्ट बताती है कि वह नेपाल के रास्ते सीरिया जाने की फिराक में था। सीरिया जाना मतलब ISIS जैसी विचारधारा से जुड़ना। गनीमत रही कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसे रोक दिया, वरना वह शायद किसी बड़े आतंकी थिएटर का हिस्सा बन चुका होता।
इसके अलावा, उसका कनेक्शन मो. सलीम उर्फ सौरभ वैद्य से मिला है। सौरभ वैद्य वही शख्स है जिसे मध्य प्रदेश ATS ने ‘हिज्ब-उत-तहरीर’ (HuT) से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। HuT एक और कट्टरपंथी संगठन है जो दुनिया भर में खिलाफत स्थापित करना चाहता है। बीकानेर का सदीक, एमपी के सौरभ से जुड़ा था और ढाका के JMB से। यह त्रिकोण बताता है कि भारत के अलग-अलग राज्यों में कट्टरपंथ का एक सिंडिकेट काम कर रहा है।
