बकरीद पर बकरे काटने पर आपत्ति क्यों नहीं- नितेश राणे

नितेश राणे

महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने आगामी कुंभ मेले के लिए नासिक में पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाले पर्यावरणविदों के रवैये पर बृहस्पतिवार को सवाल उठाया और पूछा कि वे ईद पर बकरे काटने के खिलाफ क्यों नहीं बोलते। नितेश राणे ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि तपोवन में पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता जताने वाले पर्यावरणवादी ईद के समय बकरियों की हत्या का विरोध कभी करते नहीं दिखाई देते। तब वे चुप क्यों रहते हैं। क्या सभी धर्म समान हैं। अपने बयान पर विवाद बढ़ने के बाद मीडिया से बात करते हुए नितेश राणे ने कहा- ये लोग पेड़ों को गले लगाते हैं, तो बकरी को क्यों नहीं लगाते। ईद में बड़े पैमाने पर बकरियों की हत्या होती है, खून बहता है, लेकिन तब पर्यावरणवादी बोलते नहीं दिखाई देते।

नाशिक शहर में अक्टूबर 2026 में शुरू होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए साधुग्राम निर्माण के तहत 1,800 पेड़ काटने की तैयारी नासिक नगर निगम ने शुरू कर दी है। इसी कारण 1,800 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, और इस पर पर्यावरण कार्यकर्ताओं व नागरिकों ने मोर्चा खोला है। राजनीतिक दलों द्वारा भी विरोध जारी है। इसके लिए ग्रीन मार्किंग का काम भी शुरू हो चुका है। साधु-महंतों के ठहरने की व्यवस्था करने के लिए 1500 एकड़ में साधुग्राम बसाया जाना है। नासिक के तपोवन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की योजना के खिलाफ स्थानीय हिंदू संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक दल भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं। हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने कुछ दिन पहले तपोवन में हनुमान चालीसा का पाठ किया था, जबकि कुछ अन्य हिंदू संगठनों के समर्थकों ने नासिक नगर निगम द्वारा हटाए जाने के लिए चिह्नित पेड़ों पर ‘जय श्रीराम, जय हनुमान’ के नारे वाले पोस्टर चिपकाए थे।

ऐसे में नितेश राणे का कहना है कि वे कभी यह कहते नहीं कि वर्चुअल बकरी ईद मनाओ। फिर एक धर्म के लिए एक न्याय और दूसरे के लिए दूसरा क्यों। मैं तो बस इतना पूछ रहा हूं। उन्होंने आगे कहा- पेड़ जिंदा रहें, यह पर्यावरण की दृष्टि से सही मुद्दा है। लेकिन अगर पेड़ों को गले लगा सकते हैं तो बकरी को क्यों नहीं। मेरा सवाल बिल्कुल सरल है। बकरी क्या जानवर नहीं है। सोसायटी और घरों के आस-पास ईद पर खून बहता हुआ दिखता है। तब ये पर्यावरण प्रेमी कहां होते हैं। यह मेरा सीधा सवाल है। कौन ऑक्सीजन देता है, कौन नहीं यह अलग मुद्दा है।

उन्होंने कहा कि जिस कारण से पेड़ काटे जा रहे हैं, उसी को मुद्दा बनाकर हिंदू धर्म और त्योहारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। कुंभ मेले की इतनी तैयारी चल रही है, लेकिन कुछ लोगों को इससे एलर्जी है, इसलिए वे इसकी बदनामी पर उतर आए हैं।

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