पूर्वी मुंबई के उपनगर गोवंडी में स्लम पुनर्विकास प्राधिकरण (SRA) की परियोजना के तहत घर तोड़े जाने के बाद सदमे में आने से 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। इस बाबत पुलिस ने रविवार को SRA पुनर्विकास समिति के सदस्यों और बिल्डर के खिलाफ मामला दर्ज किया। बुज़ुर्ग की मौत 5 मार्च को हुई।
पुलिस ने आरोपियों की पहचान अरुण कांबले, विजय कसबे, रतन निरभवने, आशा निरभवने और बिल्डर सदानंद शेट्टी के रूप में की है।
मृतक अनिल पगारे अपनी 53 वर्षीय पत्नी कविता और 22 वर्षीय बेटी के साथ लिबोनी बाग इलाके में रहते थे। पुलिस के अनुसार, परिवार ने घर खाली करने के लिए कुछ और समय मांगा था क्योंकि उनकी बेटी की परीक्षाएं चल रही थीं। इसके लिए उन्होंने 4 मार्च को SRA कार्यालय में जाकर समय बढ़ाने का अनुरोध भी किया था। परन्तु अगले ही दिन अधिकारी और लिबोनी बाग SRA सहकारी हाउसिंग संगठन के सदस्य ढांचा गिराने के लिए पहुंच गए।
एक अधिकारी ने बताया, “परिवार ने तोड़फोड़ रोकने की कोशिश की और कुछ और समय देने की मांग की, लेकिन घर को तोड़ दिया गया।”
पुलिस के मुताबिक, घर टूटने के बाद अनिल पगारे काफी परेशान दिख रहे थे और बाद में बेहोश हो गए। उन्हें पास के अस्पताल ले जाया गया और फिर राजावाड़ी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसी दिन उन्हें मृत घोषित कर दिया।
यह पुनर्विकास परियोजना 2006 में प्रस्तावित की गई थी, जिसमें लिबोनी बाग इलाके के लगभग 350 घर शामिल हैं। इनमें से 270 घर पहले ही तोड़े जा चुके हैं।
पुलिस ने बताया कि परिवार का आरोप है कि घर तोड़ने से पहले उन्हें पुनर्विकास योजना से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे। परिवार का आरोप है कि उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और घर टूटने के बाद तनाव के कारण व्यक्ति की मौत हो गई। इसी आधार पर मामला दर्ज किया गया है।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (धोखाधड़ी), 351 (आपराधिक धमकी) और 61 (आपराधिक साजिश) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
