मुलुंड डंपिंग ग्राउंड की ज़मीन 5 साल के लिए धारावी पुनर्विकास परियोजना को लीज़ पर देकर BMC कमाएगी 103.47 करोड़ रुपये

 

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुलुंड डंपिंग ग्राउंड की पुनः प्राप्त (रिक्लेम्ड) 15 एकड़ ज़मीन को धारावी पुनर्विकास परियोजना (DRP) के लिए पांच वर्ष की अवधि के लिए लीज़ पर देकर अनुमानित 103.47 करोड़ रुपये की आय अर्जित करेगी। इस भूमि का उपयोग कास्टिंग यार्ड, प्रीकास्ट निर्माण इकाई (Precast Manufacturing Unit) और रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांट स्थापित करने के लिए किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर मंगलवार को सुधार समिति (Improvement Committee) की बैठक में चर्चा हुई और अगली बैठक में इसके मंज़ूर होने की संभावना है।

प्रस्ताव के अनुसार, 60,703 वर्गमीटर भूमि राज्य सरकार द्वारा नियुक्त परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को लीज़ पर दी जाएगी। इस भूखंड पर वर्तमान में बायोमाइनिंग का कार्य चल रहा है और यहां अभी भी लगभग 2.5 लाख से 3 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा (Legacy Waste) मौजूद है, जिसे भूमि सौंपने से पहले हटाया जाएगा।

BMC ने लीज़ का किराया 252 प्रति वर्गमीटर प्रति माह तय किया है। यह दर BMC के ब्रिज विभाग द्वारा अवसंरचना परियोजनाओं के कास्टिंग यार्ड के लिए पहले से स्वीकृत दर के आधार पर निर्धारित की गई है। इसमें हर वर्ष 6 प्रतिशत की वृद्धि के प्रावधान के साथ पांच वर्षों में कुल 103.47 करोड़ रुपये की सकल लीज़ आय होने का अनुमान है।

परियोजना डेवलपर लगभग 20.04 करोड़ रुपये की लागत से भूमि का साइट रिमेडिएशन (सुधार एवं पुनर्स्थापन) कार्य करेगा। मुख्य अभियंता (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन) द्वारा प्रमाणन के बाद यह राशि लीज़ किराए में समायोजित कर दी जाएगी। इस समायोजन के बाद BMC को 83.44 करोड़ रुपये का शुद्ध लीज़ किराया मिलने की उम्मीद है, जबकि 18 प्रतिशत जीएसटी सहित कुल भुगतान लगभग 100 करोड़ रुपये होगा।

डेवलपर छह महीने का लीज़ किराया और GST अग्रिम रूप से जमा करेगा। इसके बाद अगले 14 महीनों में साइट रिमेडिएशन की लागत का समायोजन किया जाएगा, जिसके पश्चात वार्षिक वृद्धि के साथ पूरा लीज़ किराया देय होगा।

भूमि डेवलपर को “जैसी है, जहां है” (As Is Where Is) आधार पर सौंपी जाएगी और इसका उपयोग केवल स्वीकृत सुविधाओं की स्थापना के लिए ही किया जा सकेगा। पांच वर्ष की लीज़ अवधि बढ़ाने के लिए सक्षम प्राधिकारी से नई मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

डेवलपर सभी वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुरूप पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने तथा स्थल पर सीसीटीवी निगरानी, एक्सेस कंट्रोल और अन्य सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे की व्यवस्था करने के लिए जिम्मेदार होगा।

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