पूर्व DGP संजय पांडेय
महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) संजय पांडेय ने ठाणे में उनके खिलाफ दर्ज जबरन वसूली, आपराधिक साजिश और जालसाजी की FIR को रद्द करने की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। संजय पांडेय ने दावा किया है कि कारोबारी संजय पुनमिया द्वारा दर्ज कराई गई यह FIR “राजनीतिक प्रतिशोध” के तहत काफी देरी से दर्ज की गई। संजय पुनमिया ने आरोप लगाया है कि संजय पांडेय ने वर्ष 2021 में DGP पद का दुरुपयोग कर उनसे जबरन पैसे वसूले और झूठे बयान देने के लिए दबाव बनाया।
संजय पांडेय के वकील मिहिर देसाई और राहुल कामेरकर ने अदालत में दलील दी कि FIR तीन साल की देरी से दर्ज की गई है और यह जून 2022 में मुंबई पुलिस आयुक्त पद से सेवानिवृत्ति के बाद से उनके खिलाफ चल रहे “राजनीतिक प्रतिशोध” का हिस्सा है। याचिका में अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) का मुद्दा भी उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि कथित सभी घटनाएं मुंबई पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में हुईं, जो DGP के नियंत्रण क्षेत्र से बाहर है। संजय पांडेय ने कहा- महाराष्ट्र के DGP मुंबई पुलिस अधिकारियों को निर्देश नहीं देते। वे पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को रिपोर्ट करते हैं। इसलिए आवेदक (संजय पांडेय) कथित कृत्य नहीं कर सकता था।”
संजय पांडेय की याचिका में FIR दर्ज करने में तीन साल से अधिक की देरी को उजागर करते हुए कहा गया है- यह देरी शिकायत की सामग्री की अविश्वसनीयता को दर्शाती है। यह असंभव प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता तीन साल बाद अचानक यह दावा करे कि आवेदक ने उस पर दबाव डाला, जबकि दोनों के बीच कभी कोई प्रत्यक्ष संपर्क नहीं हुआ।
याचिका में संजय पुनमिया को “आदतन मुकदमेबाज” बताते हुए कहा गया है कि महाराष्ट्र में उनके खिलाफ कई FIR दर्ज हैं, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। इसमें यह भी कहा गया है कि संजय पुनमिया द्वारा पहले दायर की गई इसी प्रकार की शिकायतें खारिज की जा चुकी हैं।
संजय पांडेय ने इस FIR को उनके खिलाफ लक्षित हमला बताते हुए कहा- मेरी सेवानिवृत्ति के बाद से यह मेरे खिलाफ चल रहे राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। याचिका में हाई कोर्ट से FIR रद्द करने और जांच पर रोक लगाने की मांग की गई है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप का कोई आधार नहीं बनता।
FIR में संजय पांडेय, दो सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने संजय पुनमिया को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर कुछ राजनीतिक नेताओं को शहरी भूमि सीमा घोटाले में फंसाने का दबाव बनाया। संजय पुनमिया का आरोप है कि जब वह वर्ष 2021 में सैफी अस्पताल में भर्ती थे, तब पुलिस अधिकारियों ने उन्हें संजय पांडेय का संदेश दिया कि वे एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फड़णवीस और परम बीर सिंह को इस मामले में फंसाएं। संजय पुनमिया ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया और दावा किया कि ये धमकियां तत्कालीन राज्य DGP संजय पांडेय के इशारे पर दी गई थीं।
इससे पहले संजय पांडेय को मनी लॉन्ड्रिंग मामले और फोन टैपिंग आरोपों से जुड़ी CBI जांच में गिरफ्तार किया गया था, हालांकि दोनों मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है। ठाणे पुलिस द्वारा दर्ज मौजूदा FIR मामले में भी उन्हें 3 जनवरी तक अग्रिम जमानत मिली हुई है।
न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजुषा देशपांडे की पीठ इस याचिका पर 18 दिसंबर को सुनवाई करेगी।
