बॉम्बे हाई कोर्ट ने ‘कैरी ऑन’ सिस्टम के तहत 751 इंजीनियरिंग छात्रों को परीक्षा में बैठने की दी अनुमति

 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के 751 इंजीनियरिंग छात्रों को मई 2026 में होने वाली तृतीय और चतुर्थ वर्ष की परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दे दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इन छात्रों के परिणाम “कैरी ऑन” प्रणाली को चुनौती देने वाली लंबित याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे। मुख्य रिट याचिका में 10 फरवरी 2025 को जारी सरकारी प्रस्ताव (Government Resolution) और विश्वविद्यालय के सर्कुलर नंबर 209 की वैधता पर सवाल उठाया गया है, जिनके माध्यम से राज्य सरकार और विश्वविद्यालय ने “कैरी ऑन” नीति को फिर से लागू और विस्तारित किया था।

संशोधित नीति के तहत इंजीनियरिंग छात्रों को कुछ शर्तों के साथ पिछले वर्षों के बैकलॉग होने के बावजूद अगले शैक्षणिक वर्ष में अस्थायी प्रवेश (प्रोविजनल एडमिशन) लेने की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने इस छूट को चुनौती देते हुए कहा कि इससे शैक्षणिक मानकों में गिरावट आती है और यह मौजूदा नियमों के विपरीत है। न्यायमूर्ति गौतम आंखड़ और न्यायमूर्ति सन्देश पाटिल की अवकाशकालीन पीठ ने उन छात्रों को अंतरिम राहत प्रदान की, जिन्होंने 2025 की नीति के तहत उच्च शैक्षणिक वर्षों में प्रोविजनल प्रवेश लेने के बाद अपने बैकलॉग पेपर पास कर लिए थे। कुछ छात्रों की ओर से पेश अधिवक्ता पूजा थोरात ने अदालत को बताया कि जुलाई 2025 में प्रोविजनल एडमिशन लेने के बाद छात्र पहले ही लेक्चर, प्रैक्टिकल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में भाग ले चुके हैं। छात्रों के वकीलों ने अन्य छात्रों को इसी प्रकार की राहत देने वाले पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया।

ये अंतरिम आवेदन उन छात्रों द्वारा दायर किए गए थे जिन्हें प्रथम वर्ष के बैकलॉग के बावजूद तृतीय वर्ष इंजीनियरिंग में तथा द्वितीय वर्ष के बैकलॉग के बावजूद चतुर्थ वर्ष इंजीनियरिंग में प्रवेश दिया गया था। मूल याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता उदय वारुंजकर ने इन याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि आवेदकों को लंबित रिट याचिका में हस्तक्षेप करने के बजाय स्वतंत्र याचिकाएं दायर करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य याचिका में पहले अंतरिम राहत देने से इन्कार किया जा चुका है। हालांकि, विश्वविद्यालय ने अदालत को बताया कि पूर्व के आदेशों में समान परिस्थितियों वाले छात्रों को “कैरी ऑन” प्रणाली के तहत जारी रखने की अनुमति दी गई थी, बशर्ते सुरक्षा उपायों और अंतिम निर्णय का पालन किया जाए।

पीठ ने कहा कि छात्रों ने उस समय प्रवेश लिया था “जब सर्कुलर नंबर 209 लागू था और ‘कैरी ऑन’ प्रणाली का लाभ पहले ही कुछ श्रेणी के छात्रों को दिया जा चुका था।” राहत देते हुए अदालत ने कहा कि आवेदक “इस चरण पर शैक्षणिक नुकसान से बचने के लिए अंतरिम संरक्षण पाने के हकदार हैं।” अदालत ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि छात्रों के परीक्षा फॉर्म स्वीकार किए जाएं और उन्हें 20 मई 2026 से शुरू होने वाली परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दी जाए। न्यायाधीशों ने कॉलेजों और विश्वविद्यालय को यह भी निर्देश दिया कि वे 24 घंटे के भीतर छात्रों की मार्कशीट और पात्रता संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन करें। मामले की अगली सुनवाई 12 जून को मुख्य याचिका के साथ की जाएगी।

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