सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 15 मई, 2026 को सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र की राजनीतिक पार्टी शिवसेना (UBT) को आड़े हाथों लिया है। चुनाव चिह्न ‘तीर-धनुष’ को लेकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ चल रहे विवाद पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजनीतिक बयानबाजी पर तीखी नाराजगी जताई। गौरतलब हो कि जून, 2022 में शिवसेना के दो फाड़ होने के बाद से एकनाथ शिंदे ही धनुष-वाण सिंबल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस पर उद्धव ठाकरे ने आपत्ति जताई हुई है। इसको लेकर पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने शिवसेना (UBT) को अपने छुटभैया नेताओं के बयानों पर लगाम लगाने की चेतावनी दी। CJI सूर्यकांत ने कहा कि एक तरफ वकील तारीख मांगते हैं और दूसरी तरफ उनके नेता बाहर जाकर अदालत की छवि खराब करते हैं। पीठ ने साफ तौर पर चेतावनी दी कि इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुनवाई के दौरान जब ठाकरे गुट के वकील देवदत्त कामत ने मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया, तो CJI सूर्यकांत ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए मीडिया में दिए जा रहे बयानों पर फटकार लगाई।
CJI सूर्यकान्त ने देवदत्त कामत से पूछा- क्या आपने हमें कभी खाली बैठे देखा है। हम शाम 4 बजे तक काम करते हैं। इस मामले में कुछ घंटे बहस की जरूरत है। इसके लिए समय निकाला जाएगा। उस दौरान दूसरे मामलों को नहीं सुना जाएगा, लेकिन ध्यान रखिए कि हम किसी बाहरी दबाव या भ्रम फैलाने वाली चर्चा को बर्दाश्त नहीं करेंगे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को तय की गई है।
बता दें कि शिवसेना में विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे सुप्रीम कोर्ट गए थे। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा शिंदे गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह देने को गलत बताया है। आयोग ने पाया कि मूल शिवसेना के 55 विधायकों में से 40 और 18 लोकसभा सांसदों में से 13 शिंदे गुट के साथ थे। इस भारी बहुमत (करीब 76% विधायी वोट) के आधार पर शिंदे गुट को ‘असली शिवसेना’ माना गया और ‘धनुष-बाण’ उन्हें सौंप दिया गया। उद्धव गुट का कहना है कि शिवसेना बालासाहेब ठाकरे की विरासत है। उन्होंने दलील दी कि चुनाव आयोग ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे (प्रतिनिधि सभा जहां उद्धव को बहुमत था) को नजरअंदाज कर केवल विधायी बहुमत को आधार बनाया जो कि गलत है।

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