जुड़वां बेटियों की JEE एडवांस्ड तैयारी में मदद के लिए HC ने पिता को अंतरिम जमानत दी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मारपीट के एक मामले में गिरफ्तार व्यक्ति को 10 दिनों की अंतरिम जमानत दी है, ताकि वह अपनी जुड़वां बेटियों को JEE (Advanced) 2026 की तैयारी में मदद कर सके। अदालत ने कहा कि दोनों बेटियों ने JEE (Main) में 99 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं और उनके शैक्षणिक जीवन के “महत्वपूर्ण मोड़” पर उन्हें अपने पिता के मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

न्यायमूर्ति सन्देश पाटिल की एकल पीठ ने 14 मई को यह आदेश पारित किया। यह आदेश पारस शाह की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जो मार्च 2026 से न्यायिक हिरासत में हैं।

पारस शाह ने एक महीने की अस्थायी जमानत की मांग करते हुए कहा था कि उनकी बेटियां इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने अदालत से कहा कि “यह वह समय है जब जुड़वां बेटियों को अपने करियर का निर्णय लेना होगा और उन्हें आर्थिक व अन्य कारणों से अपने पिता की सहायता की आवश्यकता पड़ेगी।”

अदालत के समक्ष दी गई जानकारी के अनुसार, जुड़वां बेटियों ने JEE (Main) 2026 में क्रमशः 99.89 पर्सेंट और 99.68 पर्सेंट प्राप्त किए हैं। पीठ ने कहा कि लड़कियों का भविष्य उज्ज्वल है और “उनके पिता की अनुपस्थिति के कारण उनके करियर में बाधा नहीं आनी चाहिए,” खासकर इसलिए क्योंकि पारस शाह स्वयं एक इंजीनियर हैं और उन्हें शैक्षणिक तथा करियर संबंधी निर्णयों में मार्गदर्शन दे सकते हैं।

पीड़ित पक्ष के वकील ने इस आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि पारस शाह एक गंभीर मारपीट मामले में आरोपी हैं, जिसमें कथित तौर पर पीड़ित की आंखों की रोशनी चली गई और वह कई महीनों से गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। वकील ने अदालत से मामले में “किसी प्रकार की नरमी न दिखाने” का आग्रह किया और दावा किया कि यह आवेदन जेल से बाहर आने का प्रयास है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने पारस शाह की याचिका स्वीकार कर ली और उन्हें 16 मई से 26 मई तक अंतरिम राहत देने का निर्देश दिया। साथ ही, इस अवधि के दौरान उनके साथ एक पुलिस एस्कॉर्ट अधिकारी भी तैनात रहेगा।

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