एडवोकेट विवेक चौधरी
महाराष्ट्र स्टेट फार्मेसी कॉउन्सिल (MSPC) में लम्बे समय से चला आ रहा रजिस्ट्रेशन फीस घोटाला अब जाकर उजागर हुआ है। पूर्व फार्मासिस्ट, MSPC के पूर्व ज्वाइंट रजिस्ट्रार और अब पेशे से वकील विवेक चौधरी ने उच्च अधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
विवेक चौधरी ने 11 जून 2025 को प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस, वैद्यकीय शिक्षण एवं औषधीय द्रव्य विभाग के प्रधान सचिव IAS धीरज कुमार, लोकल फण्ड ऑडिटर, कोंकण भवन, मुंबई पुलिस कमिश्नर और महाराष्ट्र राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से लिखित शिकायत कर मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत की प्रति ABI (abinewz.com) के पास है। विवेक चौधरी ने ABI से बातचीत में कहा कि यदि प्रशासन जांच समिति नहीं बैठाती अथवा दोषियों पर कार्रवाई नहीं करती तो उनके पास बॉम्बे हाई कोर्ट में रिट पिटीशन फाइल करने का ऑप्शन खुला है।
महाराष्ट्र स्टेट फार्मेसी कॉउन्सिल (MSPC) का मुख्यालय मुंबई के उपनगर मुलुंड में है। शिकायत के अनुसार जब कोई व्यक्ति D-फार्म, B-फार्म, फार्म-D अथवा तत्सम क़्वालीफिकेशन अर्जित कर लेता है तो उसे MSPC में रजिस्टर्ड कराना होता है। इसके लिए वह MSPC में एप्लीकेशन करता है। MSPC इस रजिस्ट्रेशन के लिए 2,675 रुपये शुल्क लेकर उसे रजिस्टर्ड कर देती है।
यहां तक आपको सामान्य प्रक्रिया लगेगी। परन्तु घोटाला यहीं से शुरू होता है। 2,675 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस (शुल्क) में ही घोटाला छिपा है। नियमतः इस रजिस्ट्रेशन के वक्त, एक समय- 100 रुपये, रिन्यूअल- 50 रुपये, खो जाने पर- (डुप्लीकेट इश्यू करने पर)- 200 रुपये और एप्लीकेशन चार्ज- 25 रुपये ही लेना है। परन्तु साल 2003 से MSPC मनमानी कर 2,675 रुपये चार्ज कर रही है। बता दें कि महाराष्ट्र स्टेट फार्मेसी कॉउन्सिल-1969 के नियम-62 के तहत फीस रिवाइज्ड की जाती है तो राज्य सरकार को इत्तिला कर उसे नोटिफाई करनी होती है। यह जरूरी है। लेकिन MSPC ने ऐसा नहीं किया और समय समय पर अपने मन से फीस बढ़ा ली।
आप कह सकते हैं कि यह शुल्क तो मिनिमम है और इतना तो कोई भी पे कर सकता है। तो जवाब यह है कि राज्य सरकार की कल्याणकारी योजना के तहत दलित, वंचित, आदिवासी और गरीब तबके के लोगों के साथ किसी भी प्रकार की कोई लूट खसोट नहीं होनी चाहिए। वैसे भी MSPC में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए वाड़ा, मोखाड़ा, चंद्रपुर, विक्रमगढ़, नवाबपुर, नंदूरबार और तड़ोदा आदि जैसे पिछड़े और आदिवासी इलाके के भी आवेदक आते हैं।
किताब घोटाला
MSPC रजिस्ट्रेशन के वक़्त जो 2,675 रुपये चार्ज करती है उसमें छोटी-छोटी किताबों की कीमत भी इंक्लूड होती है। ड्रग इन्फॉर्मेशन सेंटर पब्लिकेशन नाम की इन किताबों की कीमत 250 रुपये होती है। अब तक 2 लाख फार्मासिस्ट (आवेदक) को यह पुस्तक जबरदस्ती दी जा चुकी है। शुरुआत में कुछ फार्मासिस्ट ने पाया कि उनसे MSPC ने 250 रुपये चार्ज किया लेकिन उन किताबों की कीमत मात्र 145 रुपये ही थी। सबसे बड़ी बात। साल 2018 से अब तक तकरीबन एक लाख फार्मासिस्ट को किताब दी ही नहीं है, परन्तु 250 रुपये चार्ज ले लिया है। इसमें एक घोटाला यह भी है कि किताब की लाखों प्रतियां छपती हैं लेकिन प्रकाशन में कोई पारदर्शिता नहीं रहती। MSPC अपनी ‘पसंद’ के प्रिंटर्स-पब्लिशर्स से किताबें छपवा लेती है। किसी को नहीं पता कि उन किताबों की कॉस्ट कितनी पड़ती है और किस आधार पर MSPC उन किताबों का 250 रुपये चार्ज करती है।
नोट : अगले अंक में पढ़िए- MSPC में सर्विस चार्ज, कॉर्प्स फण्ड डोनेशन, GST, इन्कम टैक्स और FD घोटाला।

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