मनोज पांडे
समाजवादी पार्टी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए तीन विधायकों, गोशाईगंज से विधायक अभय सिंह, गौरीगंज से राकेश प्रताप सिंह और ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडे को पार्टी से निष्कासित कर दिया। मनोज पांडे ने अपने निष्कासन पर प्रतिक्रिया देते हुए भावनात्मक अंदाज में कहा कि वे उस पार्टी में कैसे बने रह सकते हैं जहां- रामचरितमानस को गाली दी जाए, ग्रंथ को फाड़ा जाए, गंगा को नाला और सीता माता को अपशब्द कहे जाएं। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस विचारधारा का विरोध किया, लेकिन जब पार्टी ने आंखें मूंद लीं तो उन्होंने राजनीति को सुविधा का माध्यम मानने से इन्कार कर दिया।
मनोज पांडे ने कहा कि जब मैंने पार्टी छोड़ी, उस समय मैं मुख्य सचेतक था। यह सवाल उन लोगों से किया जाना चाहिए, जिन्होंने ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी रूप में बागी नहीं हैं। अपने फैसले को संवैधानिक अधिकार बताते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर रखा है कि राज्यसभा में कोई भी विधायक जहां चाहे, वहां वोट कर सकता है। यह हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है।
मनोज पांडे ने कहा कि उन्होंने सपा की अंदरूनी राजनीति में यह भी देखा कि पार्टी का जनाधार कमजोर हो रहा है। 403 सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बाद भी केवल 46 विधायक जीत पाए। इसका मतलब है कि जनता और ईश्वर का आशीर्वाद अब कहीं और है।
