कल्याण के उत्तर भारतीय ठगों के खिलाफ एक और FIR दर्ज, हर ठगी के सेंटर में जौनपुर की भाजपा सांसद सीमा द्विवेदी

 

अकेला

ठाणे जिले के कल्याण के उत्तर भारतीय ठगों के खिलाफ कल्याण (पूर्व) की कोलसेवाड़ी पुलिस ने FIR दर्ज की है। इसके पूर्व इन्हीं ठगों के खिलाफ ठाणे की मुम्ब्रा पुलिस ने FIR दर्ज की थी। समझा जाता है कि निकट भविष्य में इन ठगों के खिलाफ और FIR दर्ज होगी। ठगों के इस गैंग की मुखिया उत्तर प्रदेश के जौनपुर की भाजपा सांसद सीमा द्विवेदी को माना जा रहा है।

पूर्व नेता और समाजसेवक देवेंद्र सिंह की शिकायत पर कोलसेवाड़ी पुलिस ने 27 मार्च 2025 को राजेश उपाध्याय और प्रवीण सिंह के खिलाफ BNS-2023 की धारा 318(4), 316(2) और 3(5) के तहत FIR (संख्या-0265/2025) दर्ज की है। FIR की कॉपी ABI (abinewz.com) के पास है। इसके पूर्व देवेंद्र सिंह की ही शिकायत पर मुम्ब्रा पुलिस ने 16 जनवरी 2025 को भारतीय दंड संहिता-1860 की धारा 406, 420, 467, 468, 471, 500 और 34 के तहत प्रवीण सिंह, राजेश उपाध्याय, आशीष सिंह, राजेश त्रिपाठी और हरिनारायण राजभर के खिलाफ FIR (नंबर- 0094/2025) दर्ज की है। इस मामले में पुलिस ने प्रवीण सिंह को गिरफ्तार किया था। हरिनारायण राजभर सहित बाकी आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी है। केंद्र सरकार के M.S.M.E. महामण्डल का महाराष्ट्र यूनिट का चेयरमैन बना देने के नाम पर इन पाँचों ठगों ने देवेंद्र सिंह से तीन करोड़ रुपये ठग लिए थे।

कोलसेवाड़ी पुलिस की FIR के अनुसार देवेंद्र सिंह की पत्नी डॉ. ज्योति सिंह को एक दूसरा प्रसूति गृह अस्पताल खोलने के लिए जगह की जरूरत थी। साल 2008 में उन्होंने सचिन अपार्टमेंट, सर्वे नंबर-24/1, शिवसेना शाखा के बगल, कल्याण (पूर्व) में बिल्डिंग को अपने उपयोग के लायक पसंद किया। इसी बिल्डिंग में डॉ. ज्योति सिंह ने किराये पर सिद्धिविनायक अस्पताल शुरू किया। साल 2013 में सिद्धिविनायक अस्पताल को वैष्णवी धाम अपार्टमेंट में शिफ्ट कर दिया। साल 2018 में सचिन अपार्टमेंट को मालिक अनिल सुभाष शिंदे से खरीदकर वहां पर सिद्धिविनायक नेत्रालय नाम से आँखों का अस्पताल शुरू कर दिया। बता दें कि सचिन अपार्टमेंट को कल्याण महानगर पालिका (KDMC) ने अवैध घोषित किया हुआ था। ग्राउंड प्लस थ्री (Gr+3) महले की यह बिल्डिंग रोड वाइंडिंग में जा रही थी।

साल 2017 में सिद्धिविनायक अस्पताल में आशीष सिंह नाम का व्यक्ति कैंटीन चलाता था। साल 2018 में आशीष सिंह ने ही दोनों ठगों- राजेश उपाध्याय और प्रवीण सिंह- की पहचान देवेंद्र सिंह से कराई। आशीष सिंह ने राजेश उपाध्याय के बारे में बताया कि इसका इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का व्यवसाय है। इसी सिलसिले में इसकी पहचान सरकारी यंत्रणा में भी हो गयी है। प्रवीण सिंह को पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बताया। यह भी बताया कि कल्याण के सारे बड़े बड़े लोगों का CA का काम प्रवीण सिंह ही देखता है। इसके बाद राजेश उपाध्याय और प्रवीण सिंह का ‘डॉ.’ देवेंद्र सिंह के यहां रोज़ रोज़ का आना जाना शुरू हो गया। इसी बीच राजेश उपाध्याय ने दावा किया कि ठाणे कलेक्टर कार्यालय में उसकी दलाली खूब जोर शोर से चलती है। वह कलेक्टर ऑफिस में 7X12 में उनका (देवेंद्र सिंह का) नाम चढ़वा देगा। साथ ही वह सचिन अपार्टमेंट को वैध करवा देगा। इसके पहले भी उसने कल्याण में बहुत सी बिल्डिंगों को वैध घोषित करवाया है। वैसे तो खुद इस काम के लिए पर्याप्त है परन्तु जरूरत पड़ी तो सीमा द्विवेदी कलेक्टर को फोन कर देंगी। काम हो जाएगा।

जून 2021 में राजेश उपाध्याय और प्रवीण सिंह ने देवेंद्र सिंह को बताया कि कलेक्टर ऑफिस में उनकी बात हो गयी है। इसके लिए 12,00,620 रुपये डीडी के मार्फ़त ठाणे कलेक्टर ऑफिस में फी भरनी पड़ेगी। इस पर प्रवीण सिंह ने कहा कि कलेक्टर ऑफिस में राजेश उपाध्याय की बहुत ज़्यादा पहचान है। इसके लिए डीडी अगर राजेश उपाध्याय के नाम से देंगे तो काम फटाफट हो जाएगा। इसके लिए देवेंद्र सिंह ने 1 जुलाई 2021 को 12,05,000 रुपये RTGS के जरिये राजेश उपाध्याय के IDBI बैंक के खाते में भेज दिया। दूसरे दिन यानी 2 जुलाई 2021 को राजेश उपाध्याय और प्रवीण सिंह देवेंद्र सिंह के पास गए और उन्हें 12,00,620 रुपये की ‘ट्रेजरी कलेक्टर सर्वे नं. 24/1 कलेक्टर’ के नाम की डीडी दिखाई। देवेंद्र सिंह ने उस डीडी की कलर झेरॉक्स अपने पास रख ली। दोनों ‘ठगों’ ने देवेंद्र सिंह को बताया कि इस डीडी को कलेक्टर ऑफिस में जमा करने के 2 महीने बाद काम हो जाएगा। बिल्डिंग वैध हो जाएगी।

3 महीने बाद भी जब बिल्डींग वैध नहीं हुई तो देवेंद्र सिंह ने दोनों ठगों (राजेश उपाध्याय और प्रवीण सिंह) से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि कोरोना की वजह से काम स्लो हो रहा है। 2-3 महीना और लगेगा। 6 महीने बाद भी काम नहीं हुआ और राजेश उपाध्याय और प्रवीण सिंह ने देवेंद्र सिंह से संपर्क करना कम कर दिया। उनके यहां आना जाना बंद कर दिया और फोन कॉल अटेंड करना भी बंद कर दिया। धीरे धीरे 2 साल हो गए। देवेंद्र सिंह ने कलेक्टर कार्यालय जाकर पूछताछ की तो उन्हें बताया गया कि ऐसे किसी काम की वहां कोई फाइल ही नहीं बनी है। जिस ‘ट्रेजरी कलेक्टर सर्वे नं. 24/1 कलेक्टर’ विभाग के नाम ठगों ने डीडी बनवाई थी कलेक्टर ऑफिस में ऐसा कोई विभाग ही नहीं है। खुद को ठगा हुआ मानकर देवेंद्र सिंह ने राजेश उपाध्याय और प्रवीण सिंह से कैसे भी करके संपर्क किया तो वे अपनी औकात पर आ गए। उन्होंने धमकाया-तुमको जो करना है कर लो। रुपये वापस नहीं मिलेंगे। उन्होंने बताया उनके ऊपर जौनपुर की सीमा द्विवेदी का हाथ है।

देवेंद्र सिंह को मालूम पड़ा कि 12 लाख रुपये वाली डीडी उन्हें दिखाने के बाद दोनों ठगों ने उसे तुरंत रद्द करवा दिया था। उन 12 लाख रुपये में से 6 लाख रुपये राजेश उपाध्याय ने अपनी पत्नी कुसुम उपाध्याय और 6 लाख रुपये प्रवीण सिंह ने अपने भाई मनीष सिंह के बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिया था। लीगल ओपिनियन लेने के बाद देवेंद्र सिंह ने राजेश उपाध्याय और प्रवीण सिंह के खिलाफ कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करवा दी।

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