अकेला
इज़हार-ए-मोहब्बत बेधड़क होनी चाहिए !
चाय हो या इश्क़ हो कड़क होनी चाहिए !!
आप जो चित्र देख रहे हैं यह सांताक्रूज़ एयरपोर्ट के पास स्थित ताज होटल (Taj Santacruz) का है। एक वेटर, (कैप्टन-कमांडर) टिपिकल कांच के गिलास में चाय लिए हुए है। उस कांच के गिलास को देखकर आप यह भूल मत करना कि वह वेटर मुंबई के फुटपाथ पर कस्टमर को कटिंग चाय सर्व करने जा रहा है। दरअसल, मुंबई के फुटपाथ की कटिंग चाय अब फाइव स्टार होटल ताज सांताक्रूज़ पहुँच गयी है।
ABI (abinewz.com ) सालों से होटल ताज सांताक्रूज़ में जाता रहा है। पिछले सप्ताह टिपिकल कांच के गिलास में चाय देखकर सहसा यकीन नहीं हुआ। फिर ABI (अकेला ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन) ने प्रबंधक से पूछ ही लिया कि यह क्या है। प्रबंधक ने बताया यह इस साल ‘मानसून मैजिक’ में यह नया प्रयोग है। इसे भी ‘कटिंग चाय’ ही नाम दिया है। देसी लुक आये इसलिए टिपिकल वही कांच का गिलास यूज किया है। सिर्फ कटिंग चाय की कीमत है मात्र 625 रुपये। टैक्स अलग से। कटिंग चाय के साथ मानसून मैजिक में वड़ा-पाव, समोसा, ब्रेड पकोड़ा, कांदा भजिया अथवा मुंबई टोस्टी लेने पर इसकी कीमत 925 रुपये हो जाती है। टैक्स अलग से। वैसे ताज होटल में एक नॉर्मल चाय की कीमत 450 रुपये से शुरू होती है और 2,125 रुपये तक पहुंच जाती है। एक आम आदमी का सपना होता है ताज होटल में चाय पीने का।
ज़्यादा बड़ा शायर नहीं हूँ मैं… !
चाय को मोहब्बत लिख लिया करता हूँ…!!
यह 12वीं शताब्दी की बात है। पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य की सिंघपो जनजाति गरम पानी में जो भी जंगली पत्ती मिश्रण कर पीती थी कालांतर में उसका ही नाम चाय नाम पड़ा। सिंघपो प्रमुख ने वर्ष 1823 में अंग्रेज रॉबर्ट ब्रूस उसके भाई चार्ल्स ब्रूस को चाय से परिचित कराया। फिर ब्रूस ब्रदर्स ने इस पर शोध कर, चीनी और दूध मिलाकर इसे लग्जरियस और जरूरत का पेय बना दिया।
महाराष्ट्र में खासकर मुंबई में एक चाय को ‘कट’ यानी ‘बांट’ कर पीने की प्रथा शुरू हुई। यहीं से इसका नाम ‘कटिंग’ पड़ गया। चाय टपरी वाला पाँचों अँगुलियों में पकड़कर ग्राहकों के सामने ही एक ही बाल्टी के गंदे पानी में डुबो-डुबो कर गिलास धोता है। देखकर घिन आती है। परन्तु मुम्बईकर करें क्या ? ‘कटिंग चाय’ मुंबईकरों की जरूरत और मजबूरी बन गयी है। यह विशुद्ध देसी चाय होती है। इसी देसी चाय को फुटपाथ से उठाकर ताज सांताक्रूज़ होटल के प्रबंधक ने फाइव स्टार होटल की शान बना दिया है। ताज सांताक्रूज़ के रेगुलर मेहमान ‘कटिंग चाय’ को बहुत पसंद कर रहे हैं।
ऐ ज़िन्दगी आ चल !
कहीं चाय पीते हैं बैठकर !!
तू भी थक गयी होगी !
मुझे भगाते भगाते !!

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