बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति संदीप मारणे की पीठ ने महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार को मध्य मुंबई के दादर स्थित सावरकर सदन को धरोहर का दर्जा देने के मुद्दे पर रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। पीठ का सवाल है कि जिन्ना हाउस को यदि हेरिटेज का दर्जा है तो ‘सावरकर सदन’ को क्यों नहीं।
बता दें कि पंकज के. फडनीस के नेतृत्व वाले एक हिंदू संगठन, अभिनव भारत कांग्रेस द्वारा दायर एक जनहित याचिका में इस इमारत के लिए धरोहर संरक्षण का अनुरोध किया गया था। दादर के शिवाजी पार्क क्षेत्र में स्थित सावरकर सदन कभी हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर का निवास स्थान हुआ करता था।
उल्लेखनीय है कि मुंबई धरोहर संरक्षण समिति (MHCC) ने संरचना को धरोहर का दर्जा देने की सिफारिश की थी। इसके बाद बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने दर्जा देने के लिए सरकार को पत्र लिखा था। हालांकि अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है।
पीठ को एक सरकारी वकील ने सूचित किया कि MHCC को एक नयी सिफारिश करनी होगी। इसके बाद अदालत ने इसके पीछे के कारण पर सवाल उठाया। पीठ ने कहा कि पहले की सिफ़ारिश में क्या दिक्कत है? MHCC ने सिफ़ारिश की थी, इसलिए BMC ने आपको (सरकार को) पत्र लिखकर इसे ग्रेड दो धरोहर संरचना घोषित करने के लिए कहा। पीठ ने सरकार और BMC को अपने हलफ़नामे दाखिल करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त के लिए निर्धारित कर दी।

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