अमेरिका के बाद अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक रिपोर्ट में पहली बार पहलगाम आतंकी हमले में कथित भूमिका के लिए पाकिस्तान स्थित द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का नाम लिया गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध निगरानी टीम (एमटी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि TRF ने जम्मू-कश्मीर में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की दो बार जिम्मेदारी ली थी और हमले वाली जगह की तस्वीर भी प्रकाशित की थी।
हाल ही में अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने TRF को अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित किया था। यूएनएससी 1267 (आइसीआइएस, अलकायदा) प्रतिबंध समिति की इस रिपोर्ट को 21 जुलाई को अंतिम रूप दिया गया और इसे बुधवार को सार्वजनिक किया गया। यह रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जब UNSC का अस्थाई सदस्य पाकिस्तान इस संगठन की अध्यक्षता कर रहा है। रिपोर्ट में पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा गया है -‘यूएनएससी के एक सदस्य ने टीआरएफ के लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के साथ संबंधों को खारिज किया और कहा है कि एलईटी अब निष्क्रिय है।
रिपोर्ट में कहा गया है – 22 अप्रैल को पांच आतंकियों ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में एक पर्यटक स्थल पर हमला किया, जिसमें 26 नागरिक मारे गए। उसी दिन TRF ने हमले की जिम्मेदारी ली और हमले के स्थल की एक तस्वीर प्रसारित की। अगले दिन जिम्मेदारी का दावा दोहराया गया, लेकिन 26 अप्रैल को टीआरएफ ने अपनी जिम्मेदारी के दावे को वापस ले लिया। इसके बाद TRF की ओर से कोई और संचार नहीं हुआ। किसी अन्य समूह ने भी जिम्मेदारी नहीं ली। क्षेत्रीय स्तर पर तनाव बना हुआ है और आतंकी समूह इन तनावों का फायदा उठा सकते हैं।
एक सदस्य देश ने कहा कि यह हमला लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के समर्थन के बिना नहीं हो सकता था और टीआरएफ और एलईटी के बीच संबंध है। इस रिपोर्ट में टीआरएफ का उल्लेख सीधे तौर पर पाकिस्तान की कूटनीतिक हार है, खासकर तब जबकि वह यूएनएससी का सदस्य है और इस महीने इस संगठन की अध्यक्षता कर रहा है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2019 के बाद पहली बार मानिटरिंग समिति की रिपोर्ट में पाकिस्तान के आतंकी संगठन का उल्लेख किया गया है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने संसद में यह दावा किया था कि पहलगाम हमले के बाद यूएनएससी की तरफ से जारी बयान में टीआरएफ का नाम हटाने में उन्हें सफलता मिली है।
भारत की खुफिया एजेंसियों के अनुसार, यूएनएससी की रिपोर्ट ने टीआरएफ की आड़ में भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की पाकिस्तानी सेना के मंसूबों को सामने ला दिया है। पाकिस्तान ने काफी सोच-समझकर एलईटी और जैश के आतंकियों को मिलाकर टीआरएफ और पीपुल अगेंस्ट फासिस्ट फ्रंट जैसे नाम वाले संगठनों का गठन किया है। इनका उद्देश्य जम्मू और कश्मीर में आतंकी घटनाओं को स्थानीय रूप देना है।
भारत का विदेश मंत्रालय 2023 से ही टीआरएफ को लेकर वैश्विक बिरादरी को सतर्क कर रहा है। मई 2024 में भारत के अधिकारियों ने यूएनएससी के सभी सदस्यों के समक्ष टीआरएफ की गतिविधियों पर जानकारी दी थी। इस संदर्भ में विशेष कूटनीतिक दल भी भेजे गए हैं। नई दिल्ली में कई देशों के राजदूतों को समय-समय पर इस विषय में जानकारी दी जाती रही है। भारत को अमेरिका और फ्रांस से विशेष सहयोग मिल रहा है।

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