उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के महोली गांव निवासी पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी हत्याकांड के दोनों शूटरों को विशेष कार्य बल (STF) ने मुठभेड़ में मार गिराया है। राजू उर्फ रिजवान और संजय उर्फ अकील मुठभेड़ में मारे गए हैं। दोनों सगे भाई थे। देर रात STF, क्राइम ब्रांच सहित स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम के साथ यह इन्कॉउंटर हुआ।
पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी (36) की हत्या की साजिश कारेदेव बाबा मंदिर के पुजारी शिवानंद बाबा उर्फ विकास राठौर ने रची थी। राघवेंद्र बाजपेयी ने पुजारी को मंदिर परिसर में किसी के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। पुजारी को डर था राघवेंद्र बाजपेयी यह बात बाहर न बता दें इसलिए शूटरों को सुपारी दे दी थी। राघवेंद्र वाजपेयी की 8 मार्च 2025 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 8 मार्च की दोपहर करीब दो बजे उनके पास एक फोन आया और वे घर से निकल पड़े। करीब एक घंटे बाद उनकी हत्या की खबर आ गई। यह जांच STF को सौंपी गयी थी। इस केस में पुलिस पुजारी शिवानंद बाबा समेत तीन आरोपियों को जेल भेज चुकी है।
पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने बताया- STF और पुलिस को शूटरों की मूवमेंट की सूचना मिली थी। गुरुवार सुबह टीम पिसावा इलाके में चेकिंग कर रही थी। दौरान दो शूटर बाइक से आए। टीम ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन शूटरों ने फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों शूटरों को गोली लग गई। दोनों को जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
शूटरों की पहचान राजू उर्फ रिजवान और संजय उर्फ अकील के रूप में हुई। दोनों सगे भाई थे। इनकी मां हिंदू जबकि पिता मुस्लिम है। दोनों शूटरों पर एक-एक लाख का इनाम था।

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