कल्याण कोर्ट के सत्र न्यायाधीश को याचिका में अपशब्द कहने वाले याचिकाकर्ता से बॉम्बे हाईकोर्ट ने लिखित में माफ़ी मंगवाई

 

ठाणे जिले के कल्याण कोर्ट के एक सत्र न्यायाधीश को अपनी याचिका में अपशब्द कहने वाले याचिकाकर्ता से बॉम्बे हाईकोर्ट ने लिखित में माफ़ी मांगने का आदेश दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने न्यायाधीश के लिए इस्तेमाल की गयी भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह न्यायाधीश को धमकी देने जैसा है।

कल्याण में रहनेवाले और पेशे से इंटीरियर डिज़ाइनर प्रमोद गायकवाड़ ने कल्याण न्यायालय के एक सत्र न्यायाधीश के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर वकील सुष्मित फटाले के जरिये बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका (नंबर- 3476/2025) दायर की थी। 23 जुलाई 2025 को इस याचिका पर न्यायाधीशद्वय श्री रवींद्र घुगे और श्री गौतम अंखड़ ने सुनवाई की। याचिका में कल्याण सत्र न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ विभागीय जांच करने, निलंबित करने, बर्खाश्त करने की मांग की गयी थी। न्यायाधीशद्वय श्री रवींद्र घुगे और श्री गौतम अंखड़ ने याचिका का अवलोकन करने पर पाया कि कल्याण सत्र न्यायाधीश के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया गया है। इस पर न्यायाधीशद्वय श्री रवींद्र घुगे और श्री गौतम अंखड़ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि उनके पास दो ऑप्शन हैं। या तो याचिकाकर्ता कल्याण सत्र न्यायाधीश से 21 दिनों के अंदर उसी कोर्ट में लिखित में माफ़ी मांगे या वे उसके खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट का प्रोसीजर स्टार्ट करें। याचिकाकर्ता के वकील ने कल्याण सत्र न्यायाधीश से लिखित में माफ़ी मांगने की बात मान ली। इस पर न्यायाधीशद्वय श्री रवींद्र घुगे और श्री गौतम अंखड़ ने याचिकाकर्ता की याचिका रद्द कर दी।

कल्याण (पश्चिम) के खड़कपाड़ा पुलिस स्टेशन में SC/ST के तहत दर्ज एक FIR को लेकर कल्याण सत्र न्यायालय में मामला लंबित है। मामले के जाँच अधिकारी उप निरीक्षक अर्जुन दांडेगांवकर है। बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीशद्वय श्री रवींद्र घुगे और श्री गौतम अंखड़ ने याचिकाकर्ता को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में उसे किसी कार्यवाही में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए पाया गया तो कोर्ट उसे गंभीरता से लेगा।

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