जॉन बोल्टन
अमेरिकी ख़ुफ़िया और सुरक्षा एजेंसी FBI के एजेंटों ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के घर और दफ़्तर पर छापा मारा। गोपनीय दस्तावेज़ों से जुड़े एक मामले में उनके ख़िलाफ़ यह कार्रवाई की गई है। जॉन बोल्टन रूस-यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर ट्रंप की नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं। हाल के दिनों में वह भारत पर लगाए गए ट्रंप के टैरिफ़ का भी कड़ा विरोध करते नज़र आए हैं।
शुक्रवार, 22 फरवरी 2025 की सुबह मैरीलैंड के बेथेस्डा स्थित बोल्टन के घर के बाहर पुलिस की गाड़ियां और FBI अधिकारी दिखाई दिए। इनमें से कुछ अधिकारियों को घर के भीतर बॉक्स ले जाते देखा गया। FBI एजेंट बोल्टन के वॉशिंगटन डीसी स्थित दफ़्तर में भी पहुंचे। शुक्रवार दोपहर को बोल्टन अपने मैरीलैंड स्थित घर लौट आए, लेकिन बाहर मौजूद पत्रकारों से उन्होंने कोई बातचीत नहीं की।
FBI निदेशक काश पटेल ने जॉन बोल्टन के घर रेड की पुष्टि की है। काश पटेल ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। FBI एजेंट मिशन पर हैं।
जॉन बोल्टन ट्रंप के पहले कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। साल 2020 में उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ काम करने के अपने अनुभव पर एक किताब लिखी थी। इसमें उन्होंने कहा था कि ट्रंप को विदेश नीति के बारे में कुछ भी पता नहीं है। इसके बाद व्हाइट हाउस ने उन पर गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।
जॉन बोल्टन ने अभी तक इस जांच पर कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही उन्हें हिरासत में लिया गया है या उनके ख़िलाफ़ कोई मामला दर्ज किया गया है। पत्रकारों ने जब जांच के बारे में पूछा तो ट्रंप ने कहा कि वह इस मामले में “हस्तक्षेप नहीं करना चाहते”, लेकिन उन्होंने बोल्टन को “धोखेबाज़” कहा। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने सीधे तौर पर तलाशी का आदेश नहीं दिया था।
जॉन बोल्टन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था- जब ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ लगाया, लेकिन चीन पर नहीं। यही कारण हो सकता है कि भारत रूस-चीन के और करीब हो गया। ट्रंप प्रशासन का यह ध्यान न देना एक अनजाने में हुई गलती है। अगर डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका को इस बात से दिक्कत है कि भारत ने रूसी तेल को खरीदकर उसे रिफाइन कर इंटरनेशनल मार्केट में बेचा तो इस पर चर्चा होनी चाहिए। ये भी सच्चाई है कि भारत ने किसी तरह के प्रतिबंध को नहीं तोड़ा है।
