‘जिन महिला वकीलों ने मुझे आंख मारी, उन्हें कोर्ट से अनुकूल फैसले मिले’, बयान पर पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने माफ़ी मांगी

मार्कण्डेय काटजू

सुप्रीम कोर्ट के बड़बोले पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू ने माफ़ी मांग ली है। महिला वकीलों के संगठन की नाराजगी के बाद मार्कण्डेय काटजू ने माफ़ी मांगी। मार्कण्डेय काटजू ने कहा था कि जो महिला वकील उन्हें आँख मारती थी, वे उसके हक़ में फैसला सुनाते थे।

20 अगस्त 2025 को मार्कण्डेय काटजू ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा था कि जिन महिला वकीलों ने उन्हें आंख मारी, उन्हें अनुकूल न्यायिक आदेश मिले, लेकिन कुछ ही देर बाद इसे हटा दिया था।

इस टिप्पणी ने सुप्रीम कोर्ट महिला वकील एसोसिएशन (SCWLA) का ध्यान आकर्षित किया, जिसने इस पोस्ट की कड़ी निंदा की और बिना शर्त माफी की मांग की।
अब अपने बयान में जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने लिखा: “मैं फेसबुक पर यह पोस्ट करने के लिए माफ़ी मांगता हूँ कि जिन महिला वकीलों ने मुझे आँख मारी, उन्हें अनुकूल आदेश मिले। यह एक मज़ाक के तौर पर कहा गया था, और वास्तव में मैंने पोस्ट करने के तुरंत बाद ही वह पोस्ट हटा दिया था। हालाँकि, ऐसा लगता है कि कई महिला वकीलों ने इसे गंभीरता से लिया और उन्हें ठेस पहुँची। इसलिए, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट महिला वकील संघ ने मांग की है, मैं माफ़ी मांगता हूँ।”

जस्टिस मार्कण्डेय काटजू के बेवकूफी भरे बयान

2011 में, न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त होने के बाद से 78 वर्षीय पूर्व न्यायाधीश द्वारा की गई सार्वजनिक गलतियों की लंबी सूची में शामिल हो गया है। अतीत में भी उन्होंने सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद अपने अक्सर विवादास्पद बयानों को वापस ले लिया था।

2011 में, काटजू ने कहा था कि क्रिकेटरों और फ़िल्मी सितारों को भारत रत्न देना इस सम्मान का मज़ाक उड़ाना होगा क्योंकि इन लोगों का कोई ‘सामाजिक सरोकार’ नहीं होता।

2012 में, दिल्ली में एक सेमिनार में बोलते हुए न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू ने टिप्पणी की थी कि “कम से कम 90 प्रतिशत भारतीय मूर्ख हैं” जिन्हें धर्म के नाम पर आसानी से गुमराह किया जा सकता है।

2012 में, उन्होंने सलमान रुश्दी को ‘मामूली’ और ‘औसत दर्जे का लेखक कहा था। उनका कहना था कि रुश्दी का ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रेन’ मुश्किल से महान साहित्य की श्रेणी में आता है।

2013 में, उन्होंने कहा मेरा मानना है कि मिर्जा गालिब को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए। अगर सरदार वल्लभ भाई पटेल और बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर को उनकी मृत्यु के बाद दिया जा सकता है तो गालिब को क्यों नहीं।

2015 में, उन्होंने बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ को भारत का अगला राष्ट्रपति बनाने का सुझाव देने के एक दिन बाद माफ़ी मांगी थी।

2015 में, महात्मा गांधी को “एक ब्रिटिश एजेंट जिसने भारत को बहुत नुकसान पहुँचाया” कहा था। आलोचना होने पर माफ़ी मांगी।

2015 में, उन्होंने कहा था कि अगर दिल्ली चुनाव में BJP किरण बेदी की जगह शाजिया इल्मी को CM उम्मीदवार बनाती तो नतीजे बेहतर होते, क्योंकि शाज़िया “ज्यादा खूबसूरत” हैं।

2015 में, गाय तो जानवर है, वह इंसानों की माता कैसे हो सकती है। गाय भी घोड़े और कुत्ते की तरह जानवर है। मैं उसे माता नहीं मानता। यह फालतू बातें हैं। मैं बीफ खाता हूं और खाता रहूंगा। देखता हूं, मुझे कौन रोकता है, कहा था। इस पर उनकी काफी आलोचना हुई थी।

2020 में, हाथरस गैंगरेप केस पर उन्होंने टिप्पणी की थी कि “रेप पुरुषों की प्राकृतिक प्रवृत्ति है, बेरोजगारी और शादी न हो पाने से यह बढ़ती है।”

2025 में, उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस जापान के लिए काम करते थे। उन्होंने कई बार जापान की मदद की। वास्तव में बोस का इस्तेमाल जापानियों द्वारा किया जा रहा था, और वे उन्हें उसी समय मार देते, जब उनकी उपयोगिता खत्म हो जाती। लेकिन साल 1945 में जब जापान ने आत्मसमर्पण किया तो वे कहां चले गए, इसका पता अभी तक नहीं लग सका। इससे शक गहरा गया कि सुभाष चंद्र बोस जापान के एजेंट के रूप में काम करते थे।

मार्कंडेय काटजू साल 2006 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे और 2011 में रिटायर हुए। इससे पहले वे मद्रास हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद 2014 तक उन्होंने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की जिम्मेदारी भी संभाली।

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