17 साल बाद मिला मुंबई को अंडरवर्ल्ड का ‘डैडी’

 

अकेला

मुंबई अंडरवर्ल्ड सरगना से राजनेता बना अरुण गुलाब गवली उर्फ़ डैडी अपने मुंबई निवास स्थान दगड़ी चाल में पधार चुका है। 76 वर्षीय अरुण गवली 17 साल से शिवसेना नगरसेवक कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के आरोप में जेल में सजा काट रहा था। अरुण गवली पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। अरुण गवली को ट्रायल कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट ने उम्रकैद और 17 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। 9 दिसंबर 2019 को अरुण गवली ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर सुनाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने अरुण गवली की जमानत पर मुहर लगा दी।

नागपुर सेंट्रल जेल में सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अरुण गवली को बुधवार दोपहर लगभग 12:30 बजे जेल से रिहा कर दिया गया। अरुण गवली के परिवार समेत कई समर्थकों ने उसका भव्य स्वागत किया। नागपुर पुलिस सुरक्षा के बीच अरुण गवली को नागपुर के डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर हवाई अड्डे पर और फिर विमान से मुंबई लेकर आयी।

अरुण गवली का जन्म 17 जुलाई 1955 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगांव में हुआ था। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखता था और उसके पिता गुलाबराव गवली मजदूरी और बाद में मुंबई की सिम्पलेक्स मिल में काम करते थे। उनकी मां लक्ष्मीबाई गृहिणी थीं। आर्थिक तंगी के कारण गवली ने मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़ दी और कम उम्र में ही काम शुरू कर दिया था।

1980 और 1990 के दशक में वह मुंबई के अंडरवर्ल्ड का एक प्रमुख चेहरा हुआ करता था। सेंट्रल मुंबई के दगड़ी चॉल क्षेत्र में अपने गैंग की वजह से उसका नाम काफी चर्चा में रहता था। 1980 के दशक में अरुण गवली ने दाऊद इब्राहिम के साथ काम किया। दाऊद इब्राहीम ने अरुण गवली के भाई पापा गवली की हत्या करवा दी। इससे अरुण गवली दाऊद इब्राहिम गैंग से अलग हो गया। तब उसके गिरोह का संचालन बाबू रेशिम और रमा नाईक करते थे। साल 1988 में रमा नाईक के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद अरुण गवली ने गिरोह का संचालन अपने हाथ में ले लिया।

1990 के दशक में मुंबई पुलिस के बढ़ते दबाव और गैंगवार से बचने के लिए गवली ने राजनीति में कदम रखा और अखिल भारतीय सेना (ABS- अभासे) नामक पार्टी बनाई। पार्टी गठन के बाद अरुण गवली ने शक्ति प्रदर्शन किया और आज़ाद मैदान में विशाल मोर्चा निकाला। मोर्चे में शामिल लोगों की संख्या देखकर अन्य राजनीतिक पार्टियों की चूलें हिल गयीं। 2004 में वह चिंचपोकली से विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बना। यह बात शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को पसंद नहीं आयी। इसके बाद से उस पर संकट ही संकट आते रहे।

अरुण गवली का मुंबई अंडरवर्ल्ड में बहुत बड़ा नाम था। इतना ही नहीं, अरुण गवली की जीवनी पर दो फिल्में भी बन चुकी हैं। पहली फिल्म साल 2015 की मराठी भाषा में दगड़ी चॉल। इसमें मकरंद देशपांडे ने का डैडी का किरदार निभाया था। दूसरी फिल्म डैडी 8 सितम्बर 2017 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म में अर्जुन रामपाल ने अरुण गवली की भूमिका निभाई थी। यह फिल्म बताती है कि कैसे गवली अंडरवर्ल्ड डॉन से नेता बना था।

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