मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का कपड़ा बाज़ार मुसलमान मुक्त हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एकलव्य सिंह गौड़ के फरमान पर 200 मुसलमान व्यापारियों और कर्मचारियों (सेल्समैंनों) को बाज़ार से भगा दिया गया है। लव ज़िहाद की बढ़ती घटनाओं से हिन्दू व्यापारी चिंतित थे।
एकलव्य सिंह गौड़ इंदौर-4 विधानसभा सीट से भाजपा विधायक मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ के बेटे हैं। वे ‘हिन्द रक्षा’ नाम संगठन भी चलाते हैं। एकलव्य सिंह गौड़ ने व्यापारियों की बंद कमरे में बैठक ली थी और कहा था कि कपड़ों की दुकानों पर हिन्दू महिलाएं आती हैं। मुस्लिम कर्मचारी ग्राहकी के बहाने उनसे मेल-जोल बढ़ाते हैं और लव जिहाद को अंजाम देते हैं। ऐसे में बाजार को मुसलमान मुक्त कर दिया जाए। एकलव्य गौड़ के आदेश का पालन हुआ और सभी मुसलमानों को कपड़ा बाजार से भगा दिया गया। बाजार में करीब 1000 दुकानें हैं। इनमें 200 दुकानदार और कर्मचारी मुसलमान थे।
मज़ेदार बात है कि एक हिन्दू दुकानदार सुखविंदर सिंह का पार्टनर मुसलमान आदिल था। सुखविंदर सिंह को भी बाजार से भगा दिया गया। एक दुकानदार ने इसे ‘बाजार का शुद्धिकरण’ अभियान बताया।
शीतला माता कपड़ा व्यापारी संघ के अध्यक्ष हेमा पंजवानी का कहना है कि हिंद रक्षा संगठन के हमारे भैया एकलव्य सिंह गौड़ का आदेश था, हम उसका पालन कर रहे हैं। उन्होंने हर दुकानदार को बुलाकर समझाया कि बाज़ार में जो चल रहा है (लव जिहाद), उसको तुरंत बंद किया जाए। मुस्लिम लोग अब यहां से जा चुके हैं।
एकलव्य सिंह गौड़ ने स्थानीय मीडिया को कई बार दिए अपने बयान में कहा कि मेरे पास कई बार लव जिहाद की शिकायतें आ चुकी हैं। यह षडयंत्र अब कोई कल्पना या मनगढ़ंत बात नहीं है। हमारे कपड़ा बाज़ार में ज़्यादातर महिलाएं आती हैं और मुस्लिम सेल्समैन उन्हें लव जिहाद में फंसा लेते हैं। इस बीच “जिहादी मानसिकता से छुटकारा दिलाने के लिए धन्यवाद” के इंदौर के बाज़ार पोस्टर भी लगाए गए।
बता दें कि इसके विरोध में मुसलमान सेल्समैन और व्यापारियों ने इंदौर के संभागायुक्त के नाम शिकायती ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इंदौर गए थे लेकिन वहां व्यापारियों ने उनका विरोध किया था। बाद में वे सराफा थाने पहुंचे। वहां एकलव्य सिंह गौड़ के समर्थक भी जमा हो गए। थाने के बाहर व्यापारियों ने दिग्विजय सिंह पर चूड़ियां फेंकीं और ‘दिग्विजय सिंह वापस जाओ’ के नारे लगाए थे।
