दीपक सुर्वे
अकेला
मुंबई की अँधेरी कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. जीडी निर्मले ने MIDC पुलिस स्टेशन के कॉन्स्टेबल संतोष बापूराव राठौड़ को रॉबरी के केस से बाइज़्ज़त बरी कर दिया। संतोष राठौड़ 11 माह तलोजा जेल में रहे और पुलिस विभाग से बर्खाश्त कर दिए गए थे। संतोष राठौड़ के साथ इतना सब इसलिए हुआ कि वे तात्कालिक सीनियर इंस्पेक्टर शैलेश पासलवाड़ के ‘करीबी’ थे। मिल स्पेशल थे। इससे इंस्पेक्टर संतोष जाधव को जलन होती थी। फिर संतोष जाधव और इंस्पेक्टर दीपक विजय सुर्वे ने संतोष राठौड़ को रॉबरी केस में ‘फिट’ कर दिया।
राजकुमार लूथरा की शिकायत पर MIDC पुलिस स्टेशन में 22 अप्रैल 2020 को संतोष राठौड़, विपुल चांबरिया, लक्ष्मण दांडू, शंकर येशु, राजेश मारपक्का, विकास चांवदी, मुन्नाप्रसाद खैरवार, धीमान्त चौहान, इरफ़ान मुलानी और पंकज गौड़ के खिलाफ IPC की धारा 454, 457, 380, r/w 34, 109, 120(बी) के तहत FIR (नंबर- 251/2020) दर्ज हुई थी। इन पर ब्लॉक नंबर- 110, नीरज इंडस्ट्रियल इस्टेट, महाकाली रोड, अँधेरी (पूर्व) में स्थित सोना ओवरसीज़ कंपनी में हीरा, सोना और नकदी की चोरी का आरोप था। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया था। 25 सितम्बर 2025 को न्यायाधीश डॉ. जीडी निर्मले ने सभी आरोपियों को सबूत के अभाव में बाइज़्ज़त बरी कर दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट के बड़े वकील मंगेश देशमुख ने संतोष राठौड़ और अन्य कुछ आरोपियों की तरफ से पैरवी की।
कहानी अब शुरू होती है। प्रत्येक पुलिस स्टेशन में मिल स्पेशल की पोस्ट होती है। मिल स्पेशल सीनियर इंस्पेक्टर का ‘करीबी’ होता है। संतोष राठौड़ भी मिल स्पेशल थे और सीनियर इंस्पेक्टर शैलेश पासलवाड़ के करीबी थे। यही बात इंस्पेक्टर (कानून व व्यवस्था) संतोष जाधव को अच्छी नहीं लगती थी। वे चाहते थे कि संतोष राठौड़ उनके भी ‘वफादार’ रहें। इस बीच शैलेश पासलवाड़ का ओशिवरा पुलिस स्टेशन में तबादला हो गया। उनकी जगह जगदीश शिंदे आ गए। उसी समय इंस्पेक्टर (अपराध) दीपक सुर्वे भी नेहरूनगर पुलिस स्टेशन से ट्रांसफर होकर MIDC पुलिस स्टेशन आ गए। उसी समय हीरा कारखाने में चोरी की वारदात भी हो गयी। पहले से खार खाये बैठे संतोष जाधव ने जगदीश शिंदे और दीपक सुर्वे के कान में पता नहीं क्या मन्त्र फूंक दिया कि दीपक सुर्वे ने संतोष राठौड़ को उस रॉबरी केस में गिरफ्तार कर लिया। संतोष राठौड़ को ही रॉबरी का मास्टरमाइंड बता दिया। संतोष राठौड़ के इन्फॉर्मर इरफ़ान मुलानी को भी गिरफ्तार कर लिया।
दीपक सुर्वे को संतोष राठौड़ को कैसे भी करके गिरफ्तार करना था इसलिए उन्होंने कानूनी तरीके से नहीं अपने तरीके से इन्वेस्टिगेशन किया। दीपक सुर्वे ने मोहम्मद सलीम हनीदुल्लाह खान और हारुन अब्दुल मलिन को विटनेस बनाया था। सलीम और हारुन हार्डकोर क्रिमिनल थे। दीपक सुर्वे जब नेहरुनगर पुलिस स्टेशन में थे तो सलीम और हारुन को वे प्रत्येक केस में विटनेस बनाते थे। विटनेस बनने का उन्हें प्रशिक्षण दिया था। दीपक सुर्वे के ऐसे तकरीबन 22 मामलों में सलीम और हारुन विटनेस थे। संतोष राठौड़ को फ्रेम करने के लिए दीपक सुर्वे ने सलीम और हारुन को नेहरुनगर से इम्पोर्ट किया था। पुलिसिया भाषा में इसे स्टॉक विटनेस कहते हैं। दूसरी मजेदार बात। FIR में यह कन्फर्म नहीं लिखा है कि रॉबरी कितने की हुई थी। शुरुआत में दीपक सुर्वे ने 15 लाख रुपये लिखा था। फिर दूसरी जगह 7 करोड़ रुपये कर दिया और चार्जशीट में 8 करोड़ रुपये कर दिया। ऐसी दर्जनों कहानियां हैं जिससे साबित होता है कि दीपक सुर्वे ने संतोष राठौड़ को रॉबरी केस में फंसाया था।
अब दीपक सुर्वे की कहानी पढ़िए। दीपक सुर्वे ने तो फ्री में अपने कांस्टेबल को रॉबरी केस में फंसाया नहीं होगा। (1) ये वही दीपक सुर्वे हैं जिनके खिलाफ चूनाभट्टी पुलिस स्टेशन में एक महिला ने एट्रोसिटी की FIR दर्ज करवाई थी। (2) दीपक सुर्वे अपनी पत्नी अर्चना सुर्वे के नाम से संजीवनी डिस्ट्रीब्युटर नाम से मेडिकल कंपनी चलाते हैं। इस कंपनी में 50 लाख रुपये का इन्वेस्टमेंट है। (3) भांडुप रेलवे स्टेशन के पास दीपक सुर्वे का एक गाला है। इस गाले को उन्होंने फ्रूट जूस वाले को किराये पर दिया हुआ है। यहां से उन्हें 60,000 रुपये महीना भाड़ा मिलता है। (4) गाले की कीमत अलग से। (5) बताते हैं दीपक सुर्वे का पालघर में एक रिसोर्ट है। एक पुलिसवाला उसमें पार्टनर है। रिसोर्ट की कीमत 5 करोड़ रुपये है। दीपक सुर्वे इस वक़्त नवी मुंबई के न्हावा शेवा पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर हैं।
इंस्पेक्टर संतोष जाधव अभी पुणे में कार्यरत हैं। EVM मशीन के एक मामले में उनके खिलाफ पुणे में FIR दर्ज हुई है।
