पुणे में बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के शेडयूल्ड H1, HB और खांसी की दवाइयां बेच रहे मेडिकल स्टोर्स, ABI के पास 22 मेडिकल स्टोर्स के प्रूफ !!

 

अकेला ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (ABI) ने पुणे के 22 मेडिकल स्टोर्स पर अपने प्रतिनिधि भेजकर फैक्ट्स चेक कराया और पाया कि फ़ूड एन्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) का दावा झूठा है। FDA ने दावा किया था कि उनके अधिकारी प्रत्येक मेडिकल स्टोर्स की चेकिंग कर रहे हैं और इससे मेडिकल स्टोर्स बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के दवाइयां नहीं बेच रहे हैं। 22 मेडिकल स्टोर्स ने ABI को बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के शेडयूल्ड H1, HB और खांसी की दवाइयां बिंदास बेच दीं।

राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में खांसी की सीरप पीने से 20 बच्चों की मौत हो गयी। इससे महाराष्ट्र FDA हरकत में आयी और 7 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी किया कि कोई भी मेडिकल स्टोर्स बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के खांसी की दवाई न बेचे। महाराष्ट्र FDA ने इसमें केंद्र सरकार के 3 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश का हवाला दिया है। हालांकि बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के शेडयूल्ड H1, HB और खांसी की दवाइयां बेचने का आदेश पहले से पारित है। महाराष्ट्र FDA ने दावा किया कि उन्होंने मुंबई और पुणे में मेडिकल स्टोर्स का विजिट किया। दोषी पाए जाने पर मेडिकल स्टोर्स पर एक्शन भी लिया है। महाराष्ट्र FDA का दावा सच भी हो सकता है लेकिन उनके एक्शन का मेडिकल स्टोर्स पर ज़्यादा असर नहीं पड़ा है।

ABI ने सोमवार और मंगलवार को पुणे के वेलनेस फॉरएवर, एप्पल केमिस्ट, वेलनेस 24, मां हिंगलाज मेडिको, दर्शन मेडिको (ब्रांच-2), एसमंथन मेडिकल स्टोर्स, फार्मा एन मोर (24/7), ओम केमिस्ट एन्ड ड्रगिस्ट, न्यू पंडोल मेडिकल, विनोद मेडिकल्स, ओपल फार्मेसी, भावना केमिस्ट, श्री गणेश मेडिकल स्टोर, हैप्पीनेस फॉरएवर लाइफस्टाइल केमिस्ट और मणिपाल हॉस्पिटल्स जैसी 22 दुकानों से दवाइयां और सीरप खरीदा। मजेदार बात है कि मेडिकल स्टोर वाले पेशेंट का नाम पूछते थे। ABI ने सबको प्रदीप पाटिल बताया। प्रदीप पाटिल FDA कमिश्नर राजेश नार्वेकर के PA का नाम है। और डॉक्टर का नाम पूछने पर विजय जाधव बताया। विजय जाधव FDA के ज्वाइंट कमिश्नर हैं।

एक और महत्वपूर्ण बात। जितनी भी दवाइयों (शेडयूल्ड़ H1, H अथवा OTC) के बिल ABI के पास हैं। किसी पर भी फार्मासिस्ट की सिग्नेचर नहीं है। किसी पर भी एक्सपायरी की तारीख अथवा बैच नंबर नहीं लिखा है। इस प्रकार FDA के दावे को ABI ने झूठा साबित कर दिया है। FDA अपने ही आदेश को लेकर गंभीर नहीं है। यह सच है कि FDA ने कुछ मेडिकल स्टोर्स को स्टॉप सेल की नोटिस दी है लेकिन उसमें DI की निजी ‘खुन्नस’ ज़्यादा दिखती है। DI ने उन मेडिकल स्टोर्स पर एक्सट्रा मेहनत कर कमियां निकाली हैं।

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