सिवनी हवाला मनी लूटकांड में SDOP समेत 11 पुलिसकर्मियों पर FIR, सभी सस्पेंड, 5 गिरफ्तार

SDOP पूजा पांडे

मध्य प्रदेश के सिवनी हवाला मनी लूटकांड में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आदेश के बाद SDOP पूजा पांडे सहित 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ डकैती, अवैध रूप से रोकना, अपहरण और आपराधिक षडयंत्र की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। सभी आरोपियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि सिवनी पुलिस ने नागपुर के व्यापारी सोहन परमार से लगभग तीन करोड़ रुपए बरामद किए थे, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में जब्ती केवल एक करोड़ 45 लाख रुपए की दिखाई। आरोप है कि पुलिस ने शेष रकम हड़प ली और आरोपी को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिया। वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस जब्ती की जानकारी समय पर नहीं दी गई, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया। मामले के उजागर होने के बाद 9 अक्टूबर की रात जबलपुर रेंज के आईजी प्रमोद वर्मा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी अर्पित भैरम सहित नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। अगले ही दिन डीजीपी कैलाश मकवाना ने एसडीओपी पूजा पांडे को भी निलंबित कर दिया। 1.45 करोड़ रुपए की बरामदगी के बाद यह पूरा घटनाक्रम सियासी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर सुर्खियों में आ गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले पर सख़्त रुख़ अपनाते हुए कहा कानून तोड़ने वाला चाहे कोई भी हो, बख़्शा नहीं जाएगा।

जिन 11 पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज हुआ है, उनमें एसडीओपी पूजा पांडे, एसआई अर्पित भैरम, प्रधान आरक्षक माखन और राजेश जंघेला, आरक्षक रविंद्र उईके, आरक्षक चालक रितेश, गनमैन केदार, गनमैन सदाफल, कॉन्स्टेबल योगेंद्र, नीरज और जगदीश शामिल हैं। इनमें से पांच पुलिसकर्मी, जिसमें पूजा पांडे, अर्पित भैरम, योगेंद्र, नीरज और जगदीश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 11 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज कराई, जिनमें एसडीओपी पूजा पांडे और टीआई अर्पित भैरम भी शामिल हैं। अब तक पांच आरोपी पुलिसकर्मी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मामला लखनवाड़ा थाना क्षेत्र की है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद गृह विभाग ने विशेष जांच के आदेश दिए। जांच में लखनवाड़ा थाना प्रभारी सहित कई पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की धारा 310(2) (डकैती), 140(3) (किडनैपिंग), 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) और संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (धारा 112(2), 3(5)) के तहत मामला दर्ज किया गया।

पुलिस को सूचना मिली थी कि जबलपुर से नागपुर बड़ी मात्रा में अवैध नकदी और मादक पदार्थ ले जाया जा रहा है। इसके बाद एमएच13 ईके 3430 नंबर की क्रेटा कार को शीलादेवी गांव के पास रोका गया। जांच में 1.45 करोड़ रुपए नकद मिले, जबकि गाड़ी में बैठे कुछ लोग मौके से फरार हो गए। पुलिस ने जब्त रकम को 10 अक्टूबर को कोतवाली थाने के मालखाने में जमा कराया और उसे जुआ-सट्टे की रकम बताते हुए औपचारिक कार्रवाई दर्ज की।

हवाला कारोबारियों सोहन परमार, इरफ़ान पठान और शेख मुख़्तार ने 9 अक्टूबर को कोतवाली थाने में 2.96 करोड़ रुपए की लूट की एफआईआर दर्ज कराई थी। सूत्रों का कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने पहले उन्हें सौदा पटाने का प्रस्ताव दिया था। 10 अक्टूबर को SDOP पूजा पांडे ने हवाला कारोबारियों को 1.51 करोड़ रुपए लौटाते हुए मामला खत्म करने को कहा। लेकिन रास्ते में गिनती करने पर 25 लाख रुपए कम निकले, जिसके बाद उन्होंने पूरी 2.96 करोड़ रुपए की रकम की लूट की शिकायत दर्ज कराई।

नागपुर निवासी सोहन परमार ने शिकायत में बताया कि वह कटनी के एक सर्राफा व्यापारी के 2 करोड़ 96 लाख 500 रुपए लेकर कार से महाराष्ट्र के जालना जा रहा था। रास्ते में एसडीओपी पूजा पांडे और बंडोल थाना प्रभारी अर्पित भैरम ने गाड़ी रोककर जांच के नाम पर नकदी से भरा बैग जब्त कर लिया।

शिकायत के अनुसार, पुलिस ने परमार और उसके साथियों को थाने में रातभर बैठाए रखा और अगली सुबह बिना कार्रवाई के छोड़ दिया। जब उन्होंने अपने मालिक को पूरी बात बताई तो वह नागपुर से सिवनी पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने सिर्फ 1.45 करोड़ रुपए की जब्ती दिखाई। आरोप है कि लगभग डेढ़ करोड़ रुपए की रकम अफसरों ने आपस में बांट ली।

सुबह तक इस कार्रवाई की जानकारी एसपी सुनील कुमार मेहता या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई। जब शाम तक कोई रिपोर्ट नहीं आई तो मीडिया में खबर फैलने लगी। इसके बाद एएसपी दीपक मिश्रा ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और मामले की जानकारी आईजी प्रमोद वर्मा को दी। देर रात आईजी वर्मा ने तत्काल 9 पुलिसकर्मियों के निलंबन के आदेश जारी कर दिए।

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