बिहार की राजनीति में परिवारवाद हावी, RJD सबसे आगे… 71 में 30 विधायक वंशवादी पृष्ठभूमि से

 

बिहार की राजनीति पर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जो राज्य की विधानसभा में गहरे जड़ जमा चुके परिवारवाद को उजागर करती है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा किए गए एक विश्लेषण के अनुसार, बिहार विधानसभा के निवर्तमान 243 विधायकों में से कुल 70 (यानी 28.81 प्रतिशत) विधायक वंशवादी पृष्ठभूमि से आते हैं।

इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सबसे आगे है। राजद के 71 विधायकों में से 30 विधायक वंशवादी हैं, जो पार्टी के निवर्तमान विधायकों का 42.25 प्रतिशत है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि बिहार में परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने में राजद ने प्रमुख भूमिका निभाई है।

इन वंशवादी नेताओं में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बेटे, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं। इनके अलावा, निवर्तमान विधानसभा में राजद की ओर से कम से कम सात ऐसे सदस्य हैं, जिनके परिवार के सदस्य पहले मंत्री रह चुके हैं। वंशवादी विधायकों की इस सूची में पूर्व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और हरिहर सिंह के बेटे भी शामिल हैं।

प्रमुख दलों के आंकड़ों पर गौर करें तो, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) भी इस मामले में पीछे नहीं है। जदयू के निवर्तमान 44 विधायकों में से 16 (यानी 36.36 प्रतिशत) विधायक वंशवादी हैं। वहीं, भाजपा में वंशवादी विधायकों की संख्या राजद और जदयू के संयुक्त आंकड़े से बस तीन सीटें ही कम है, हालांकि अखबार में उसका सटीक आंकड़ा नहीं दिया गया है। कांग्रेस के 19 विधायकों में से चार (यानी 21.25 प्रतिशत) विधायक वंशवादी हैं।

निवर्तमान जदयू-भाजपा राज्य सरकार के सात मंत्री भी वंशवादी पृष्ठभूमि से आते हैं। इनमें पहले वंश की कड़ी में जदयू के विजय कुमार चौधरी, महेश्वर हजारी, शीला कुमारी और सुनील कुमार तथा भाजपा के नितिन नवीन का नाम शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में दूसरी और तीसरी पीढ़ी के वंशवादी भी प्रमुखता से राजनीति में सक्रिय हैं। जदयू के मंत्री सुमित कुमार सिंह, जिनके पिता और दादा दोनों विधायक और मंत्री रह चुके हैं, वह तीसरी पीढ़ी के वंशवादी हैं। इसी तरह, पूर्व मुख्यमंत्री शकुनी चौधरी के बेटे सम्राट चौधरी (जो हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के संस्थापक हैं) और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन मांझी जैसे नेता भी शामिल हैं।

अन्य प्रमुख वंशवादियों में राजद के युसूफ सलाहुद्दीन भी हैं, जिनके दादा सांसद थे, और जदयू के मंत्री अशोक चौधरी, जिनके पिता भी मंत्री थे।

कुल मिलाकर, बिहार जैसे राज्य में जहां कई सामाजिक और प्रगतिशील आंदोलन हुए हैं, यह आंकड़ा दिखाता है कि राजनीति में योग्यता के बजाय पारिवारिक विरासत को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति अभी भी गहराई तक जमी हुई है।

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